मदरसन सूमी के मालिक विवेक चांद सहगल क्यों हैं चर्चा में?
नोएडा में मदरसन सूमी (Motherson Sumi) के प्लांट में मजदूरों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन ने इस समय पूरे देश का ध्यान खींचा है। वेतन वृद्धि (Salary Hike) की मांग को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब और भी तेज हो गया है। इस विवाद के बीच कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन विवेक चांद सहगल सुर्खियों में आ गए हैं।
विवेक चांद सहगल न केवल एक सफल बिजनेसमैन हैं, बल्कि ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के दिग्गज माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे उन्होंने एक छोटी सी शुरुआत से 61,000 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा किया।
विवेक चांद सहगल का सफर: मां के साथ मिलकर रखी नींव
विवेक चांद सहगल की सफलता की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बहुत ही सामान्य तरीके से की थी:
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शुरुआत (1975): उन्होंने अपनी माँ के साथ मिलकर ‘मदरसन ग्रुप’ की स्थापना की।
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पहला बिजनेस: शुरुआत में यह कंपनी ऑटो पार्ट्स नहीं बल्कि चांदी के व्यापार से जुड़ी थी।
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बड़ा टर्निंग पॉइंट: जब एक प्रतिस्पर्धी कंपनी दिवालिया हुई, तो सहगल ने ऑटो सेक्टर की संभावनाओं को पहचाना और वाहन के पुर्जे बनाना शुरू किया।
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ग्लोबल विस्तार: सुमितोमो इलेक्ट्रिक के साथ साझेदारी करने के बाद, उन्होंने पिछले 12 सालों में 11 कंपनियों का अधिग्रहण किया।
कितनी है विवेक चांद सहगल की नेटवर्थ?
फोर्ब्स (Forbes) की 14 अप्रैल 2026 की रियल-टाइम रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक चांद सहगल की कुल संपत्ति 6.6 अरब डॉलर (करीब 61,472 करोड़ रुपये) है।
कंपनी का विशाल नेटवर्क:
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कर्मचारी: वर्तमान में इस ग्रुप में 1,30,000 से अधिक लोग काम करते हैं।
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ग्लोबल उपस्थिति: कंपनी का कारोबार दुनिया के 41 देशों में फैला हुआ है।
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बड़े क्लाइंट्स: फोर्ड (Ford), फॉक्सवैगन (Volkswagen) और जनरल मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियां इनसे पार्ट्स खरीदती हैं।
विवाद का कारण: नोएडा में क्यों हो रहा प्रदर्शन?
नोएडा प्लांट में मजदूरों का मुख्य विरोध वेतन में बढ़ोतरी और काम की परिस्थितियों को लेकर है। मजदूरों का कहना है कि कंपनी की वैश्विक सफलता के बावजूद उनके हितों की अनदेखी हो रही है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रदर्शन की आंच अब आसपास के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों तक भी पहुंचने लगी है।
पुरस्कार और सम्मान
विवेक चांद सहगल को भारतीय ऑटो उद्योग में उनके योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले हैं। साल 2016 में उन्हें ‘EY एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर’ (India) के खिताब से भी नवाजा गया था।
