बिहार में पिछले दो महीनों से चल रहे राजस्व कर्मियों के विरोध ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने कर्तव्य में लापरवाही और सरकारी आदेशों की अवहेलना के आरोप में 41 अंचल अधिकारियों (CO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
बिहार राजस्व सेवा महासंघ के बैनर तले करीब 600 से अधिक अधिकारी और कर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पिछले एक महीने से अंचलाधिकारी और कानूनगो ने काम का पूर्ण बहिष्कार किया हुआ है। सरकार का तर्क है कि इस हड़ताल की वजह से:
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राजस्व वसूली का लक्ष्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
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अतिक्रमण हटाने जैसे महत्वपूर्ण अभियान रुक गए हैं।
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न्यायालय के आदेशों का पालन समय पर नहीं हो पा रहा है।
प्रमुख मांगें: आखिर कर्मचारी क्यों हैं नाराज?
हड़ताल पर अड़े कर्मियों की मुख्य मांग DCLR पद पर प्रोन्नति (Promotion) है। इसके साथ ही उनकी पांच अन्य सेवा संबंधी मांगें भी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं और पारदर्शिता चाहते हैं, लेकिन अपनी न्यायसंगत मांगों से समझौता नहीं करेंगे।
आम जनता पर पड़ रहा है सीधा असर
अंचल अधिकारियों के निलंबन और जारी हड़ताल के कारण आम आदमी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र से लेकर जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) जैसे काम पूरी तरह ठप हैं। कई जिलों में डोंगल एक्टिव नहीं होने के कारण डिजिटल कामकाज भी ठप पड़ा है।
बिहार के इन जिलों के अधिकारियों पर गिरी गाज (प्रमुख नाम):
सरकार द्वारा जारी सूची में जहानाबाद, पूर्वी चंपारण, सुपौल, रोहतास, पूर्णिया, मुंगेर, और पटना (बाढ़) समेत कई जिलों के अधिकारी शामिल हैं। नियमावली 2005 के तहत इन सभी पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
नोट: सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि काम पर वापसी नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में सख्ती और बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
