आसनसोल, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आसनसोल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) पर तीखा प्रहार किया। ओवैसी ने आरोप लगाया कि दोनों ही पार्टियां अल्पसंख्यकों और गरीबों के हितों की अनदेखी कर रही हैं।
‘SIR’ लिस्ट और वोटर लिस्ट पर ओवैसी के गंभीर आरोप
संबोधन के दौरान ओवैसी ने SIR (State Inventory Register) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य की सूचियों से बड़ी संख्या में मुसलमानों और हिंदुओं के नाम काटे गए हैं।
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जवाबदेही पर सवाल: ओवैसी ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा कि सत्ता में होने के बावजूद यह उनकी जिम्मेदारी क्यों नहीं थी कि हर नागरिक का नाम लिस्ट में सुरक्षित रहे?
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वोट बैंक की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि TMC को केवल वोटों की चिंता है, जनता के अधिकारों की नहीं।
मुस्लिम बहुल इलाकों की जमीनी हकीकत
ओवैसी ने बंगाल के उन क्षेत्रों का जिक्र किया जहाँ मुस्लिम आबादी अधिक है। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर डेटा और स्थिति साझा करते हुए कहा:
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शिक्षा और स्वास्थ्य: कई ब्लॉकों में न पर्याप्त स्कूल हैं और न ही सुसज्जित अस्पताल।
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अस्पतालों की स्थिति: जहाँ अस्पताल हैं, वहां बेड की कमी है और जहाँ बेड हैं, वहां डॉक्टर नदारद हैं।
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बुनियादी सुविधाएं: स्वच्छ पेयजल और किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता की स्थिति इन इलाकों में बेहद चिंताजनक है।
“TMC की वजह से बंगाल में BJP मजबूत”
ममता बनर्जी पर हमला जारी रखते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर आज बंगाल में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है, तो इसके पीछे TMC की नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कांग्रेस और वामपंथियों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन दलों ने मुसलमानों का इस्तेमाल सिर्फ ‘मोहरे’ की तरह किया है।
“AIMIM कभी भाजपा के साथ नहीं गई, लेकिन ममता बनर्जी खुद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। बी-टीम का आरोप सिर्फ अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण की एक कोशिश है।” — असदुद्दीन ओवैसी
निष्कर्ष: क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?
ओवैसी का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि 2026 के चुनावों में AIMIM अल्पसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण को रोकने और अपना आधार मजबूत करने के लिए पूरी तैयारी में है। अब देखना यह होगा कि 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में जनता इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
