रायपुर में अनोखी कार्रवाई: जब ग्राहक बनकर पहुंचे वन अधिकारी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वन विभाग ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसने दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की साजिश रची थी।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस एक जिंदा पैंगोलिन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 50 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
विभाग ने मुखबिर से सूचना मिलने के बाद ग्राहक बनकर तस्करों से संपर्क किया और उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया।
मुख्य तथ्य:
गिरफ्तार तस्कर: खोखन हालदार (पखांजूर) और गोपाल बोपचे (रायपुर)
घटनास्थल: रायपुर का भाटागांव क्षेत्र
बरामद पैंगोलिन: लगभग 20 किलो वजनी, उम्र 10-12 साल
सौदे का प्लान: डेढ़ लाख रुपये में खरीदा, फिर ‘मोटा भाई’ नाम के बड़े तस्कर से करोड़ों में बिक्री की योजना
कैसे पकड़े गए तस्कर?
वन विभाग को पहले से ही सूचना मिल गई थी कि रायपुर में पैंगोलिन की डील होने वाली है।
तय योजना के तहत:
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ग्राहक बनकर संपर्क किया गया।
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तस्कर पैंगोलिन के साथ सौदे की जगह पहुंचे।
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विभाग की टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दोनों को हिरासत में ले लिया।
सौभाग्य से पैंगोलिन को सुरक्षित बचा लिया गया। अगर यह कार्रवाई न होती, तो यह दुर्लभ जीव तस्करों के हाथों से बाहर जा चुका होता।
पैंगोलिन: एक लुप्तप्राय और ‘अपराध’ से घिरा जीव
पैंगोलिन को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की सबसे कड़ी श्रेणी ‘शेड्यूल-1’ में रखा गया है। यानी इसकी तस्करी बेहद गंभीर अपराध है।
दुनियाभर में पैंगोलिन की तस्करी क्यों होती है?
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इसके शल्क (स्केल्स) का उपयोग अवैध दवाओं और तांत्रिक प्रयोगों में किया जाता है।
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कई एशियाई देशों में इसका मांस सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
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यह दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारियों में शामिल है।
अब आगे क्या होगा?
वन विभाग अब इस बात की तहकीकात कर रहा है कि ‘मोटा भाई’ कौन है, जिससे तस्कर संपर्क में थे। अधिकारियों को शक है कि यह एक अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा हो सकता है।
मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है। थोड़ी सी चूक भी इस दुर्लभ वन्यजीव को हमेशा के लिए खत्म कर सकती थी, लेकिन सतर्कता ने समय रहते बड़ा नुकसान टाल दिया।
