आईपीएल 2026: मजदूर के बेटे बृजेश शर्मा की संघर्ष से सफलता तक की कहानी

संघर्ष से शुरू हुई कहानी

आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेल रहे तेज गेंदबाज बृजेश शर्मा का सफर आसान नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर के छोटे से कस्बे में जन्मे बृजेश एक मजदूर के बेटे हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया।


दिल्ली में मिली दिशा

करियर के शुरुआती दौर में उन्हें जम्मू-कश्मीर में सीमित मौके मिले। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया, जहां कोच दीपक पुनिया ने उनकी प्रतिभा को निखारा।

  • शुरुआत में उनकी गेंदबाजी गति 125-128 किमी/घंटा थी
  • ट्रेनिंग के बाद यह 140+ किमी/घंटा तक पहुंची
  • यॉर्कर और स्लोअर बॉल उनकी खास ताकत बनी

दिल्ली में उन्हें बेहतर प्रतियोगिता और प्रोफेशनल माहौल मिला, जिसने उनके खेल को नई दिशा दी।


बंगाल बना टर्निंग पॉइंट

करियर में बड़ा बदलाव तब आया जब बृजेश ने बंगाल में क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया।

  • टॉप डिवीजन क्लब क्रिकेट में खेलने का मौका मिला
  • लगातार मैच खेलने से आत्मविश्वास बढ़ा
  • कोच और खिलाड़ियों के सहयोग से तकनीक मजबूत हुई

यहां उन्होंने खुद को एक भरोसेमंद टी20 गेंदबाज के रूप में स्थापित किया।


Bengal Pro T20 लीग से IPL तक

बंगाल प्रो टी20 लीग में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें पहचान दिलाई।

  • 7 मैचों में 11 विकेट
  • इकॉनमी लगभग 7.7
  • डेथ ओवर में प्रभावी गेंदबाजी

इसी प्रदर्शन के आधार पर आईपीएल स्काउट्स की नजर उन पर पड़ी और उन्हें Rajasthan Royals में जगह मिली।


बिना घरेलू मैच खेले IPL डेब्यू

दिलचस्प बात यह है कि बृजेश ने आईपीएल से पहले कोई बड़ा घरेलू टी20 टूर्नामेंट नहीं खेला था। इसके बावजूद उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें इस बड़े मंच तक पहुंचा दिया।


गुरु और सपोर्ट सिस्टम की अहम भूमिका

उनकी सफलता में कई लोगों का योगदान रहा:

  • कोच दीपक पुनिया ने ट्रेनिंग और मार्गदर्शन दिया
  • बंगाल में सहयोगियों ने रहने और खेलने का मौका दिया
  • सौरव गांगुली ने जरूरी कागजी प्रक्रिया में मदद की

आईपीएल 2026 में प्रदर्शन

राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए बृजेश ने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है।

  • मिडिल और डेथ ओवर्स में गेंदबाजी
  • इकॉनमी 9 से कम
  • विविध गेंदबाजी से बल्लेबाजों को परेशान किया

आगे का रास्ता

कोच और सहयोगियों को उम्मीद है कि बृजेश आने वाले समय में भारतीय टीम तक पहुंच सकते हैं। खासतौर पर डेथ ओवर स्पेशलिस्ट के रूप में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।

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