जयपुर रेस्टोरेंट विवाद: चप्पल पहनकर आए ग्राहक को गेट पर रोका, वीडियो वायरल होने के बाद मैनेजमेंट ने दी अपनी सफाई

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक नामी रेस्टोरेंट में पहनावे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चर्चा का विषय बन गया है। भरतपुर के रहने वाले आचार्य सतीश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उन्हें उनके पारंपरिक पहनावे— लुंगी और चप्पल— के कारण रेस्टोरेंट के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, इंटरनेट पर ‘भारतीय संस्कृति बनाम मॉडर्न ड्रेस कोड’ को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

क्या है पूरा मामला?

सतीश गुप्ता जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित ‘1932-ट्रेवी’ रेस्टोरेंट पहुंचे थे। उनका दावा है कि होटल स्टाफ ने पहले उनकी लुंगी पर आपत्ति जताई और उन्हें ट्राउजर (पैंट) पहनकर आने को कहा। जब उन्होंने विरोध किया, तो स्टाफ ने उनके ‘ओपन स्लीपर’ (खुली चप्पल) को एंट्री न देने का कारण बताया।

रेस्टोरेंट मैनेजमेंट का पक्ष: “धमकी और वीडियो का मकसद”

मामले की गहराई तक जाने के लिए जब NDTV की टीम रेस्टोरेंट पहुंची, तो फ्लोर मैनेजर विवेक और एफएंडबी मैनेजर रोचक खंडेलवाल ने कुछ अहम जानकारियां साझा कीं:

  • सुरक्षा और पॉलिसी: मैनेजमेंट का कहना है कि उनकी पॉलिसी के अनुसार ‘ओपन स्लीपर’ की अनुमति नहीं है, लेकिन वे एथनिक वियर (पारंपरिक वेशभूषा) का सम्मान करते हैं।

  • व्यवहार पर सवाल: स्टाफ का आरोप है कि वीडियो बनाने वाले शख्स ने पहले होटल कर्मियों और मालिकों को धमकाया था।

  • अलग स्पेस का विकल्प: मैनेजर ने बताया कि अगर कोई ग्राहक चप्पल में आता है और उसका व्यवहार शालीन है, तो उन्हें अक्सर एक अलग ‘कम्फर्ट जोन’ में जगह दी जाती है।

दक्षिण भारतीय मेहमानों के लिए क्या हैं नियम?

इस विवाद के बीच रेस्टोरेंट ने स्पष्ट किया है कि वे पारंपरिक पोशाक के खिलाफ नहीं हैं। यदि कोई दक्षिण भारतीय अतिथि अपनी पारंपरिक लुंगी में आता है, तो उसे प्रवेश मिल सकता है, बशर्ते वह पैरों में जूते या सैंडल (जो पीछे से बंद हों) पहने हो। उनके नियमों के मुताबिक, सिर्फ खुली चप्पलें ही प्रतिबंधित हैं।

नोट: फिलहाल इस मामले में पुलिस के पास मौखिक शिकायत की बात सामने आई है, हालांकि किसी औपचारिक FIR की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

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