नई दिल्ली/जालंधर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर डॉ. अशोक मित्तल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। जांच एजेंसी की टीमों ने पंजाब और गुरुग्राम स्थित उनके लगभग 8 से 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
गौरतलब है कि डॉ. मित्तल को हाल ही में राज्यसभा में राघव चड्ढा की जगह पार्टी का नया डिप्टी लीडर नियुक्त किया गया था। इस कार्रवाई के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
क्यों हो रही है यह छापेमारी?
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फंड में कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ी है। ED मुख्य रूप से इन पहलुओं की जांच कर रही है:
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फंड का डायवर्जन: क्या यूनिवर्सिटी के फंड का उपयोग व्यक्तिगत या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया गया?
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विदेशी निवेश: क्या किसी निवेश या दान की प्रक्रिया में विदेशी मुद्रा कानूनों (FEMA) का उल्लंघन हुआ है?
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डिजिटल सबूत: छापेमारी के दौरान एजेंसी के हाथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
सांसद के बेटे के ठिकानों पर भी रेड
सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि जांच की आंच उनके परिवार तक भी पहुंच गई है। ED ने डॉ. मित्तल के बेटे के ठिकानों पर भी तलाशी ली है, जो कई अन्य व्यावसायिक परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यूनिवर्सिटी के फंड को इन व्यावसायिक संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया था।
सियासी घमासान: “पंजाब चुनाव की तैयारी”
इस कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे केंद्र सरकार की चुनावी रणनीति बताते हुए कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध है। वहीं, सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि जहाँ-जहाँ चुनाव होते हैं, भाजपा अपनी एजेंसियों को पहले भेज देती है।
निष्कर्ष
फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई जारी है और किसी भी आधिकारिक गिरफ्तारी या जब्ती की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन और सांसद की टीम का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और सभी वित्तीय लेनदेन पारदर्शी हैं।
