धारावी पुनर्विकास पर बड़ा फैसला
मुंबई में प्रस्तावित धारावी पुनर्विकास परियोजना को लेकर एक अहम कानूनी बाधा अब खत्म हो गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोली समुदाय की ओर से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया।
क्या थी याचिका की मांग?
धारावी कोली जमात ट्रस्ट ने अदालत से मांग की थी कि:
- पहले पारंपरिक कोली भूमि (Koliwada) की स्पष्ट सीमांकन प्रक्रिया पूरी की जाए
- इसके लिए मत्स्य विभाग द्वारा सर्वे कराया जाए
- जब तक यह प्रक्रिया पूरी न हो, तब तक लगभग 50 एकड़ जमीन पर विकास कार्य रोका जाए
ट्रस्ट का कहना था कि यह भूमि वर्षों से मछली पकड़ने और उससे जुड़े कार्यों के लिए उपयोग होती रही है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा:
- 2016 में जारी सरकारी नोटिफिकेशन पहले ही अंतिम रूप ले चुका है
- इतने समय बाद सीमांकन की मांग करना उचित नहीं है
- अब इस आधार पर विकास कार्य रोकना संभव नहीं है
अदालत ने साफ कहा कि समय बीतने के बाद इस तरह की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का महत्वपूर्ण अवलोकन
अदालत ने यह भी माना कि:
- समय के साथ धारावी एक बड़े स्लम क्लस्टर में बदल गया है
- केवल पारंपरिक उपयोग के आधार पर अब भूमि पर विशेष अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता
- सीमांकन प्रक्रिया पूरी न होने को विकास रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता
क्या ट्रस्ट के लिए कोई विकल्प बचा?
हालांकि, कोर्ट ने ट्रस्ट को पूरी तरह निराश नहीं किया।
- ट्रस्ट को राज्य सरकार के सामने अपनी मांग रखने की अनुमति दी गई है
- वे भूमि रिकॉर्ड सर्वे से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं
इस फैसले का क्या असर होगा?
इस निर्णय के बाद:
- धारावी पुनर्विकास परियोजना में तेजी आने की संभावना है
- 50 एकड़ क्षेत्र में विकास कार्य शुरू करने में अब कानूनी बाधा नहीं रहेगी
- यह परियोजना मुंबई के सबसे बड़े शहरी पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स में से एक मानी जाती है
क्यों अहम है धारावी पुनर्विकास?
धारावी को एशिया के सबसे बड़े झुग्गी क्षेत्रों में गिना जाता है।
इस परियोजना का उद्देश्य:
- बेहतर आवास उपलब्ध कराना
- बुनियादी सुविधाओं में सुधार
- आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना
