भारतीय आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो (Wipro) के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है। कंपनी आगामी 16 अप्रैल को होने वाली अपनी बोर्ड बैठक में इक्विटी शेयरों के बायबैक (Buyback) प्रस्ताव पर विचार करने वाली है। लगभग तीन साल के अंतराल के बाद कंपनी एक बार फिर अपने शेयरधारकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है।
क्यों खास है यह बायबैक?
ब्रोकरेज फर्म इनवेस्टेक के विश्लेषण के अनुसार, विप्रो इस बार करीब 16,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक का ऐलान कर सकती है। इस बड़े अनुमान के पीछे कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति है:
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नेट कैश: वर्तमान में विप्रो के पास लगभग ₹41,000 करोड़ का नकद भंडार है।
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पिछला रिकॉर्ड: जून 2023 में कंपनी ने ₹12,000 करोड़ का बायबैक किया था, तब कैश पोजीशन ₹28,000 करोड़ थी।
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कानूनी बाधाएं खत्म: नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) और सब्सिडियरी के मर्जर से जुड़ी अड़चनें अब दूर हो चुकी हैं।
नतीजों पर भी रहेगी नजर
16 अप्रैल की बैठक केवल बायबैक तक सीमित नहीं रहेगी। इसी दिन विप्रो अपने चौथी तिमाही (Q4) के वित्तीय परिणामों का भी ऐलान करेगी। बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि बायबैक और नतीजे साथ आने से शेयर की चाल पर गहरा असर पड़ सकता है।
निवेशकों को क्या होगा फायदा?
शेयर बायबैक एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कंपनी अपने ही शेयर बाजार से वापस खरीदती है। इससे:
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शेयर की वैल्यू बढ़ती है: बाजार में शेयरों की संख्या कम होने से प्रति शेयर आय (EPS) में सुधार होता है।
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विश्वास की झलक: यह संकेत देता है कि कंपनी का मैनेजमेंट अपने भविष्य के बिजनेस और कैश फ्लो को लेकर आश्वस्त है।
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प्रीमियम भाव: आमतौर पर कंपनियां मौजूदा बाजार भाव से ऊंचे दाम (Premium) पर बायबैक करती हैं, जिससे छोटे निवेशकों को सीधे मुनाफे का मौका मिलता है।
नोट: विप्रो ने इससे पहले अक्टूबर 2020 में ₹9,500 करोड़ और जून 2023 में ₹445 प्रति शेयर के भाव पर बायबैक किया था। अमेरिकी बाजार (ADR) में भी इस खबर के बाद सकारात्मक रुख देखा गया है।
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