भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच कार्नोलियन एसेट मैनेजमेंट (Carnelian Asset Management) के संस्थापक विकास खेमानी ने निवेशकों को एक स्पष्ट दिशा दिखाई है। खेमानी ने मौजूदा गिरावट को ‘बायिंग अपॉर्चुनिटी’ (खरीदने का मौका) बताते हुए चुनिंदा स्टॉक्स पर दांव लगाया है।
1. IndiGo: ‘कॉन्ट्रा प्ले’ के रूप में पहली पसंद
खेमानी का सबसे बड़ा और साहसी दांव IndiGo (InterGlobe Aviation) पर है। उन्होंने हालिया गिरावट के दौरान इस एयरलाइन स्टॉक में अपनी पोजीशन और बढ़ाई है।
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वजह: अगले 5 सालों तक कोई बड़ा कॉम्पिटिशन नहीं है।
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रणनीति: वह इसे ‘लोएस्ट-कॉस्ट मार्केट लीडर’ मानते हैं। उनके अनुसार, यदि शॉर्ट-टर्म में स्टॉक सस्ता मिल रहा है, तो यह लंबी अवधि के लिए बेहतरीन मौका है।
2. पावर सेक्टर: रिन्यूएबल के बजाय ‘कन्वेंशनल’ पर भरोसा
पावर थीम पर खेमानी बुलिश तो हैं, लेकिन उनका नजरिया थोड़ा अलग है। वे उन कंपनियों को चुन रहे हैं जो पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को इनेबल (Enable) करती हैं:
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BHEL: पिछले दो साल में दमदार रिटर्न देने वाले इस स्टॉक पर उनका भरोसा कायम है।
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Kalpataru Power: ग्लोबल ट्रांसमिशन बिजनेस में मजबूती के कारण यह उनकी लिस्ट में शामिल है।
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इनसाइट: वे रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों से बच रहे हैं क्योंकि वहां प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है।
3. बैंकिंग: PSU बनाम प्राइवेट की बहस पर विराम
बैंकिंग सेक्टर में निवेश के लिए खेमानी का मानना है कि सेक्टर से ज्यादा जरूरी ‘सही स्टॉक’ का चयन है।
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PSU बैंक: बाजार की गिरावट में उन्होंने चुनिंदा सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बढ़ाई है।
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प्राइवेट बैंक: उनके पोर्टफोलियो में ICICI Bank और Federal Bank जैसे नाम शामिल हैं।
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सीख: उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे एक ही सेक्टर में होने के बावजूद HDFC Bank और ICICI Bank का प्रदर्शन एकदम अलग रहा है।
किन चीजों से बचने की दी सलाह?
एक अनुभवी फंड मैनेजर के तौर पर खेमानी ने कुछ सख्त चेतावनियां भी दी हैं:
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Zomato (Eternal): लोकप्रियता के बावजूद वे इस स्टॉक से दूर हैं क्योंकि उन्हें इसका ‘रिस्क-रिवॉर्ड’ समझ नहीं आता।
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मैनेजमेंट क्वालिटी: उनका कहना है कि निवेश में सबसे बड़ी गलती खराब प्रमोटर या मैनेजमेंट को चुनने से होती है, न कि सेक्टर गलत होने से।
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fads (अस्थायी चलन): ऐसी कंपनियों और ट्रेंड्स से बचें जिनका बिजनेस मॉडल अभी तक साबित नहीं हुआ है।
