बिहार के सुपौल जिले से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। पिपरा नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी (EO) प्रियंका कुमारी पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में करीब 6 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का गंभीर आरोप लगा है। एक RTI कार्यकर्ता द्वारा साक्ष्य पेश किए जाने के बाद विभाग में खलबली मच गई है।
मुख्य आरोप और घोटाले का गणित
RTI कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने मीडिया के सामने दस्तावेज पेश करते हुए दो मुख्य बिंदुओं पर घोटाले का दावा किया है:
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साफ-सफाई में फर्जीवाड़ा (₹3.87 करोड़): आरोप है कि सफाई कार्य के लिए जिस एजेंसी के साथ करार (Agreement) किया गया, उसने दूसरी एजेंसी के फर्जी दस्तावेज जमा किए थे। पिछले 3 साल 7 महीनों में इस एजेंसी को ₹3.87 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
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जेम (GeM) पोर्टल से महंगी खरीदारी (₹3.22 करोड़): आरोप के अनुसार, महज 13 महीनों के भीतर EO द्वारा ₹3.22 करोड़ के सामान खरीदे गए। दावा है कि इन सामानों की कीमत बाजार और जेम पोर्टल की वास्तविक दर से कहीं अधिक दिखाई गई है।
RTI कार्यकर्ता की चेतावनी
अनिल कुमार सिंह ने कहा है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं की गई, तो वह इसकी लिखित शिकायत आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में करेंगे।
अधिकारी का पक्ष
इन आरोपों पर सफाई देते हुए कार्यपालक पदाधिकारी प्रियंका कुमारी ने सभी दावों को बेबुनियाद करार दिया है। उनका कहना है कि:
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नगर पंचायत में जो भी खरीदारी या कार्य हुए हैं, वे पूरी तरह सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार हैं।
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भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं और प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई है।
निष्कर्ष: एक तरफ जहां RTI कार्यकर्ता दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन इन आरोपों को खारिज कर रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देता है या नहीं।
