मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच जिस युद्ध विराम की घोषणा कल ही हुई थी, वह धरातल पर नाकाम होती दिख रही है। ताजा संघर्ष के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं।
क्यों टूटा 24 घंटे के भीतर युद्ध विराम?
मंगलवार को अमेरिका ने दावा किया था कि इजरायल भी दो सप्ताह के युद्ध विराम के लिए सहमत है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही रही।
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इजरायली हमला: इजरायल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले जारी रखे।
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नेतन्याहू का कड़ा रुख: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनकी ‘उंगली ट्रिगर पर है’ और यह युद्ध विराम हिज़्बुल्लाह पर लागू नहीं होता।
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ईरान की प्रतिक्रिया: जवाबी कार्रवाई के रूप में ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से बंद करने का फैसला किया है।
डोनाल्ड ट्रंप की ‘टैरिफ’ चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस भू-राजनीतिक तनाव में आर्थिक हथियार का इस्तेमाल करने की धमकी दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा की:
“जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार सप्लाई कर रहे हैं, उनके द्वारा अमेरिका को बेचे जाने वाले सामान पर 50% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जाएगा। इसमें किसी को कोई छूट नहीं मिलेगी।”
यह कदम चीन और रूस जैसे देशों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है, जो ईरान के प्रमुख व्यापारिक भागीदार रहे हैं।
बाजार और आपकी जेब पर क्या होगा असर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का मतलब है वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) आपूर्ति में बड़ी बाधा। इसका सीधा असर कुछ इस तरह दिखेगा:
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कच्चा तेल (Crude Oil): आपूर्ति रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।
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शेयर बाजार: अनिश्चितता के कारण ग्लोबल मार्केट और भारतीय सेंसेक्स-निफ्टी में उतार-चढ़ाव की संभावना है।
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सोना और चांदी: आमतौर पर युद्ध के माहौल में निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन वर्तमान आर्थिक धमकियों के चलते कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।
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