नेपाल में साल 2026 के एवरेस्ट पर्वतारोहण सीजन की शुरुआत एक बेहद डरावनी सच्चाई के साथ हुई है। नेपाल की सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (CIB) ने एक ऐसे जाल का पर्दाफाश किया है, जहाँ पर्यटकों की जान बचाना नहीं, बल्कि उन्हें बीमार करना एक मुनाफे का धंधा बन गया था। इस $20 मिलियन (करीब ₹167 करोड़) के घोटाले ने पूरे हिमालयी पर्यटन उद्योग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खौफनाक साजिश: स्वस्थ पर्यटकों को बनाया जा रहा था शिकार
CIB की जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे किसी भी ट्रेकर के रोंगटे खड़े कर सकती हैं। पैसा ऐंठने के लिए पर्यटकों को इन तीन तरीकों से निशाना बनाया गया:
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भोजन में मिलावट: जांच में पाया गया कि कुछ गाइड्स ने ट्रेकर्स के खाने में बेकिंग सोडा मिलाया, ताकि उन्हें पेट की समस्या हो और लक्षण ‘एल्टीट्यूड सिकनेस’ जैसे लगें।
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दवाइयों का गलत इस्तेमाल: स्वस्थ पर्यटकों को जरूरत से ज्यादा ‘Diamox’ (ऊंचाई पर दी जाने वाली दवा) दी गई, जिससे उनके शरीर में गंभीर सूजन (HACE) के कृत्रिम लक्षण पैदा हो गए।
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डर का माहौल: थके हुए लेकिन सुरक्षित पर्यटकों को डराया गया कि वे मरने वाले हैं, ताकि उन्हें तुरंत हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए तैयार किया जा सके।
कैसे काम करता था यह ‘माउंटेन टैक्सी’ रैकेट?
यह घोटाला सिर्फ गाइड्स तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें हेलीकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पताल भी शामिल थे:
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ओवरबिलिंग: एक ही उड़ान में कई ट्रेकर्स को लाया जाता था, लेकिन बीमा कंपनियों से हर यात्री के नाम पर अलग-अलग प्राइवेट चार्टर का बिल वसूला गया।
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फर्जी कागजात: काठमांडू के अस्पतालों ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कीं।
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कमीशन का खेल: अस्पतालों ने बिल की राशि का 20% से 25% हिस्सा ट्रेकिंग एजेंसियों और हेलीकॉप्टर कंपनियों को ‘रेफरल कमीशन’ के रूप में लौटाया।
घोटाले के प्रमुख आंकड़े (एक नज़र में)
| विवरण | संख्या / विवरण |
| कुल अनुमानित घोटाला | लगभग $20 मिलियन (130 करोड़ नेपाली रुपये) |
| आरोपी | 32 व्यक्ति (9 हिरासत में, 23 फरार) |
| शामिल संस्थाएं | 16 ट्रेकिंग कंपनियां, 4 हेलीकॉप्टर कंपनियां, 3 अस्पताल |
| फर्जी रेस्क्यू | 300 से अधिक प्रमाणित मामले |
2026 सीजन पर इसका क्या असर होगा?
इस खुलासे के बाद नेपाल के पर्यटन बोर्ड के सामने विश्वसनीयता का संकट खड़ा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां अब नेपाल के कुछ क्षेत्रों को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने या प्रीमियम की दरों को भारी रूप से बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे न केवल ईमानदार ट्रेकिंग कंपनियों को नुकसान होगा, बल्कि आपातकालीन स्थिति में असली जरूरतमंदों को हेलीकॉप्टर मिलने में भी देरी हो सकती है।
