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अल नीनो का साया: 2026 में मानसून रहेगा कमजोर, अगस्त-सितंबर में इन राज्यों में बढ़ सकती है किसानों की चिंता।

नई दिल्ली: भारत में इस साल मानसून की राह देख रहे लोगों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट (Skymet) के अनुसार, साल 2026 में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। अनुमान है कि इस बार देश में सामान्य के मुकाबले सिर्फ 94% बारिश होगी, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।

मानसून 2026: मुख्य आंकड़े एक नजर में

स्काईमेट की रिपोर्ट के अनुसार, जून से सितंबर के चार महीनों के दौरान कुल 817 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि सामान्य औसत (LPA) 868.6 मिलीमीटर होता है।

  • अनुमानित बारिश: 94% (LPA का)

  • सबसे ज्यादा प्रभावित महीने: अगस्त और सितंबर

  • मुख्य कारण: प्रशांत महासागर में सक्रिय होता ‘अल नीनो’ (El Nino)

किन राज्यों में सूखे का खतरा और कहाँ राहत?

स्काईमेट ने अपनी रिपोर्ट में क्षेत्रीय आधार पर बारिश का वर्गीकरण किया है:

  • कम बारिश वाले क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। मध्य भारत के ‘रेनफेड’ (वर्षा आधारित खेती) इलाकों में भी बारिश कम रहने की आशंका है।

  • बेहतर स्थिति वाले क्षेत्र: पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय) और पूर्वी राज्यों जैसे बिहार और पश्चिम बंगाल में मानसून का प्रदर्शन बाकी देश के मुकाबले बेहतर रह सकता है।

महीने-दर-महीने बारिश का अनुमान

महीना अनुमानित बारिश (% LPA) स्थिति
जून 101% शुरुआत अच्छी रहेगी
जुलाई 95% सामान्य से थोड़ी कम
अगस्त 92% खेती के लिए संकट की स्थिति
सितंबर 89% सबसे कम बारिश

खेती और आम जनता पर क्या होगा असर?

मानसून के कमजोर रहने का सीधा असर खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का और सोयाबीन पर पड़ सकता है।

  1. सिंचाई संकट: जुलाई-अगस्त में बारिश की कमी से बांधों का जलस्तर गिर सकता है।

  2. भीषण गर्मी: अल नीनो के कारण इस साल मानसून के दौरान भी उमस और गर्मी ज्यादा रहने की आशंका है।

  3. महंगाई: यदि पैदावार कम होती है, तो आने वाले समय में अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

अल नीनो और ला नीना का गणित

पिछले साल (2025) ‘ला नीना’ की वजह से अच्छी बारिश हुई थी, लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। अल नीनो समुद्र के पानी को गर्म करता है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। यही वजह है कि 2026 में सूखे का खतरा ज्यादा नजर आ रहा है।

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