पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने वाले दो चरणों के विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी पारा अपने चरम पर है। राज्य की सत्ता पर चौथी बार काबिज होने की कोशिश में जुटी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महिलाओं के सम्मान और उनकी वित्तीय सुरक्षा को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है।
ममता बनर्जी का भाजपा पर कड़ा प्रहार
मालदा और मुर्शिदाबाद की हालिया रैलियों में मुख्यमंत्री ने भाजपा को ‘महिला विरोधी’ करार दिया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
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लक्ष्मी भंडार योजना की सुरक्षा: ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि विपक्षी दल इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
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मतदाताओं को सचेत रहने की सलाह: उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने वाली राजनीति का डटकर मुकाबला करें।
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केंद्रीय बलों पर सवाल: मुख्यमंत्री ने चुनाव के दौरान तैनात केंद्रीय बलों (CAPF) द्वारा तलाशी के नाम पर महिलाओं को परेशान किए जाने की आशंका जताई है।
भाजपा का पलटवार: सुरक्षा और न्याय का मुद्दा
वहीं, दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने महिला सुरक्षा को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
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भाजपा ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और संदेशखली के मुद्दों को केंद्र में रखते हुए सरकार की घेराबंदी की है।
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पनिहाटी सीट से आरजी कर पीड़िता की मां को चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा ने ‘न्याय’ को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने टीएमसी के 15 साल के शासन पर ‘आरोप पत्र’ जारी करते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।
2026 चुनाव के दो बड़े नैरेटिव
यह चुनाव केवल सीटों की गिनती नहीं, बल्कि दो विपरीत विचारधाराओं और दावों की लड़ाई बन चुका है:
| पक्ष | मुख्य चुनावी नैरेटिव |
| TMC | भाजपा एक ‘बाहरी’ दल है जो बंगाल की संस्कृति और महिलाओं की वित्तीय आजादी को खत्म करना चाहता है। |
| BJP | टीएमसी के शासन में भ्रष्टाचार और असुरक्षा का माहौल है; राज्य को अब ‘परिवर्तन’ और ‘सुरक्षा’ की जरूरत है। |
बंगाल की आधी आबादी का वोट किस ओर झुकता है, यही 2026 के चुनावी नतीजों की दिशा तय करेगा।
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