उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में खाकी एक बार फिर कानूनी शिकंजे में है। पुलिस की कथित कार्यशैली और अधिकारों के दुरुपयोग पर न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (डकैती) शैलेंद्र सचान ने कायमगंज क्षेत्र की एक घटना को गंभीरता से लेते हुए 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला कायमगंज क्षेत्र के काला खेल मऊ रसीदाबाद गांव का है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने जबरन उनके घर में घुसकर न केवल मारपीट की, बल्कि लूटपाट भी की।
आरोप के मुख्य बिंदु:
-
लूट का दावा: घर से 90 हजार रुपये नकद और लाखों के सोने-चांदी के जेवरात ले जाने का आरोप।
-
हिरासत में नाबालिग: जांच के दौरान पुलिस ने चार लोगों को उठाया था, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल था।
-
अवैध कार्रवाई: तीन लोगों को दो दिन बाद आग्नेयास्त्र अधिनियम (Arms Act) के तहत जेल भेज दिया गया, जिसे कोर्ट ने संदिग्ध माना है।
कोतवाल को नोटिस और 20 अप्रैल की डेडलाइन
कोर्ट की नाराजगी केवल मारपीट तक सीमित नहीं रही। कायमगंज कोतवाल मदन मोहन पर अदालत में ‘असत्य और भ्रामक रिपोर्ट’ पेश करने का आरोप है।
“न्यायालय ने कोतवाल को नोटिस जारी कर 20 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है।”
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निगरानी
विशेष न्यायाधीश ने साफ किया कि पुलिस की ऐसी कार्यप्रणाली जनता के विश्वास को तोड़ती है। इस मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) को पूरी जांच की खुद निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश में 8 नामजद और 8 अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है। स्थानीय लोगों के बीच इस फैसले को पुलिसिया जवाबदेही की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
