भारतीय राजनीति के इतिहास में कई ऐसे चेहरे रहे हैं जिन्होंने बिना किसी संवैधानिक पद के देश की दिशा तय की। लेकिन धीरेंद्र ब्रह्मचारी जैसा रहस्यमयी और प्रभावशाली व्यक्तित्व शायद ही कोई दूसरा हुआ हो। सफेद मलमल की धोती पहनने वाले इस ‘फ्लाइंग स्वामी’ की पहुंच प्रधानमंत्री के बेडरूम तक थी।
नेहरू परिवार से पहली मुलाकात की दिलचस्प कहानी
साल 1957 में जब पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी चुनावी थकान मिटाने के लिए जम्मू-कश्मीर में थे, तब उनकी मुलाकात एक युवा सन्यासी से हुई। वह सन्यासी थे धीरेंद्र ब्रह्मचारी। हठ योग में माहिर इस योगी ने जल्द ही नेहरू और इंदिरा का विश्वास जीत लिया। देखते ही देखते वे प्रधानमंत्री आवास (तीन मूर्ति भवन) के एक अहम सदस्य बन गए, जहाँ उनके लिए डाइनिंग टेबल पर हमेशा एक कुर्सी आरक्षित रहती थी।
सत्ता के गलियारों में बढ़ता रसूख: जब मंत्री भी कांपते थे
धीरेंद्र ब्रह्मचारी का प्रभाव ऐसा था कि उन्हें ‘भारत का राजपूतिन’ कहा जाने लगा।
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कैबिनेट की लिस्ट: कहा जाता है कि 1971 में मंत्रियों की लिस्ट वही थी जो ब्रह्मचारी ने पहले ही बता दी थी।
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मंत्रियों का तबादला: पूर्व पीएम इंद्र कुमार गुजराल ने अपनी आत्मकथा में जिक्र किया है कि कैसे ब्रह्मचारी की बात न मानने पर उन्हें उनके पद से डिमोट कर दिया गया था।
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टैक्स फ्री सुविधाएं: इमरजेंसी के दौरान उन्होंने अमेरिका से प्राइवेट जेट मंगवाया, जिस पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ा।
विवादों से गहरा नाता और ‘फ्लाइंग स्वामी’ की उपाधि
हवा में कलाबाजी दिखाने वाले विमानों के शौकीन ब्रह्मचारी को ‘फ्लाइंग स्वामी’ कहा जाता था। उनके पास खुद की हवाई पट्टियां और हेलीपैड थे। हालांकि, उनके मानतलाई आश्रम और शिवागन फैक्ट्री पर हथियारों की तस्करी और विदेशी मुद्रा के उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगे। शाह आयोग की जांच में उनके सत्ता के दुरुपयोग के कई सनसनीखेज खुलासे हुए।
संजय गांधी की मौत और पतन की शुरुआत
23 जून 1980 को संजय गांधी की विमान हादसे में मौत धीरेंद्र ब्रह्मचारी के लिए पतन की शुरुआत साबित हुई। वह वही ‘पिट्स’ विमान था जिसे ब्रह्मचारी ने ही असेंबल करवाया था। संजय के बाद राजीव गांधी ने कमान संभाली और ब्रह्मचारी को प्रधानमंत्री आवास से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। दूरदर्शन पर आने वाला उनका मशहूर योग कार्यक्रम भी बंद कर दिया गया।
अंतिम समय: मानतलाई से शुरू, मानतलाई पर खत्म
9 जून 1994 को एक विमान दुर्घटना में ही धीरेंद्र ब्रह्मचारी की मौत हो गई। जिस मानतलाई की पहाड़ियों से उनका सफर शुरू हुआ था, वहीं उनका निजी विमान क्रैश हो गया। आज उनके आश्रमों को सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है, जो अब योग और वेलनेस सेंटर के रूप में जाने जाते हैं।
