डिफेंस सेक्टर में अपोलो माइक्रो सिस्टम्स की ‘ऐतिहासिक’ छलांग
भारतीय रक्षा क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) के लिए 17 अप्रैल 2026 का दिन मील का पत्थर साबित हुआ। केंद्र सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (DPIIT) ने कंपनी को मिसाइल, टॉरपीडो और अन्य घातक हथियार बनाने का ‘लाइफटाइम’ लाइसेंस जारी कर दिया है।
इस खबर के आते ही शेयर बाजार में कंपनी के प्रति निवेशकों का उत्साह चरम पर दिखा और इंट्रा-डे कारोबार में शेयर 18.6% तक उछल गया।
अब केवल पुर्जे नहीं, ‘पूरा हथियार’ बनाएगी कंपनी
अभी तक अपोलो माइक्रो सिस्टम्स मुख्य रूप से डिफेंस सब-सिस्टम (पुर्जे और तकनीक) उपलब्ध कराती थी। लेकिन इस नए लाइसेंस के बाद कंपनी एक ‘पूर्ण हथियार प्रणाली निर्माता’ (Full Weapon System Manufacturer) बन गई है।
लाइसेंस के तहत क्या-क्या बना पाएगी कंपनी?
सरकार ने दो मुख्य श्रेणियों में उत्पादन की मंजूरी दी है:
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श्रेणी-I (हाई-एंड वेपन): मिसाइल, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM), टॉरपीडो और अंडरवॉटर माइंस।
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श्रेणी-II (एरियल सिस्टम): एरियल बॉम्ब, रॉकेट और लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन)।
हैदराबाद में लगेगी हथियारों की फैक्ट्री
कंपनी ने अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट कर दी है। इन घातक हथियारों का निर्माण हैदराबाद स्थित उनके दो मौजूदा प्लांट्स में किया जाएगा।
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क्षमता: प्रत्येक श्रेणी के लिए सालाना 1,000 यूनिट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
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बिजनेस मॉडल: कंपनी का कहना है कि यह लाइसेंस उनके रेवेन्यू मॉडल को पूरी तरह बदल देगा, जिससे लंबी अवधि में मुनाफे में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
शेयर बाजार में प्रदर्शन: निवेशकों को मिला मल्टीबैगर रिटर्न
लाइसेंस की खबर ने स्टॉक को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। शुक्रवार को कारोबार के अंत में शेयर 16.78% की बढ़त के साथ ₹282.95 पर बंद हुआ।
स्टॉक का ट्रैक रिकॉर्ड:
| समय सीमा | रिटर्न (%) |
| पिछले 2 हफ्ते | 44% |
| पिछला 1 साल | 136.38% |
| पिछले 5 साल | 3023% |
एडिटर नोट: डिफेंस सेक्टर में सरकार का जोर ‘आत्मनिर्भरता’ पर है। ऐसे में छोटे सब-सिस्टम प्लेयर का पूर्ण हथियार निर्माता बनना न केवल कंपनी के लिए, बल्कि भारत के रक्षा निर्यात (Defense Export) के लिए भी शुभ संकेत है।
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