नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर हुई तीन दिन की वार्ता समाप्त हो गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने भारत को ‘टेढ़ी खीर’ (hard nut to crack) बताया है। यह संकेत है कि दोनों देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं रहा।
लेकिन सवाल असली यह है – आखिर सौदा कहां अटका है और आगे क्या होगा?
🇮🇳 तीन दिन की वार्ता में क्या हुआ?
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने किया।
अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच ने किया।
बातचीत का मुख्य उद्देश्य – व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देना था।
🧱 क्यों बोले ग्रीर – “भारत टेढ़ी खीर है”?
बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की ‘वेज एंड मीन्स कमेटी’ में ग्रीर ने कहा:
“भारत ने लंबे समय से अपने कृषि बाजारों को सुरक्षित रखा है। समझौते के तहत वे इनमें से कई चीजों को बचाना चाहते हैं।”
हालाँकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ मुद्दों पर आपसी सहमति बन सकती है।
उदाहरण के तौर पर उन्होंने डीडीजी (Distiller’s Dried Grains) का नाम लिया।
📉 टैरिफ पर क्या बना?
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फरवरी 2026 में ही अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था।
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पिछले साल अगस्त में ट्रंप प्रशासन ने 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था।
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रूसी तेल खरीद पर भी अतिरिक्त 25% टैरिफ थोपा गया था।
⚖️ कोर्ट के फैसले ने दिया झटका
20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता।
इस फैसले के बाद भारत बदलते वैश्विक टैरिफ माहौल में अपने हितों को बचाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
🌽 कृषि बाजार – सबसे बड़ी रोड़ा
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत चाहता है कि उसके संवेदनशील कृषि उत्पाद (जैसे चीनी, चावल, डेयरी) सुरक्षित रहें।
अमेरिका का जोर डीडीजी, सोयाबीन मील और इथेनॉल के निर्यात को बढ़ाने पर है।
📈 आगे का लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने पहले ही फरवरी में समझौते का एक मसौदा तैयार कर लिया था।
लक्ष्य है – 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुँचाना।
👉 यह वार्ता अब और गहरी होगी। अगले कुछ महीनों में साफ हो जाएगा कि भारत कितनी छूट देता है और अमेरिका क्या बदलाव लाता है।
