अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) ने क्रिकेट कनाडा से जुड़े भ्रष्टाचार और मैच फिक्सिंग के गंभीर आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इस जांच का केंद्र 17 फरवरी 2026 को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया कनाडा बनाम न्यूजीलैंड मुकाबला है।
वह ‘एक ओवर’ जिसने शक पैदा किया
न्यूजीलैंड की पारी के पांचवें ओवर में जब कप्तान दिलप्रीत बाजवा गेंदबाजी करने आए, तब कीवी टीम का स्कोर 35/2 था। बाजवा के उस ओवर में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जिसने जांचकर्ताओं का ध्यान खींचा:
-
ओवर की शुरुआत एक नो बॉल से हुई।
-
इसके तुरंत बाद एक वाइड बॉल फेंकी गई।
-
बाजवा ने उस अकेले ओवर में 15 रन लुटा दिए।
पूर्व कोचों के चौंकाने वाले खुलासे
सिर्फ मैच फिक्सिंग ही नहीं, बल्कि टीम सिलेक्शन में बाहरी हस्तक्षेप के आरोप भी लगे हैं।
-
खुर्रम चौहान (पूर्व कोच): एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में उन्होंने दावा किया कि बोर्ड के सदस्यों ने कुछ खास खिलाड़ियों को टीम में रखने का दबाव बनाया था।
-
पुबुदु दसनायके (पूर्व कोच): इन्होंने आरोप लगाया कि 2024 वर्ल्ड कप से पहले उन पर गलत दबाव डाला गया और इनकार करने पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की धमकी दी गई।
विशेष जानकारी: यह पूरा मामला ‘कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ की डॉक्यूमेंट्री ‘करप्शन, क्राइम और क्रिकेट’ के बाद सार्वजनिक हुआ है, जिसमें क्रिकेट कनाडा के भीतर प्रशासनिक संकट और संगठित अपराध के तार जुड़े होने का दावा किया गया है।
खिलाड़ियों का बकाया और प्रशासनिक लापरवाही
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खिलाड़ियों को 2024 वर्ल्ड कप की प्राइज मनी भी समय पर नहीं मिली। इसके अलावा, जुलाई 2025 के बाद खिलाड़ियों को बिना किसी आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट के छोड़ दिया गया था, जिससे बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच दूरियां बढ़ गई थीं।
आगे क्या होगा?
ICC के अंतरिम जनरल मैनेजर एंड्रयू एफग्रेव के अनुसार, खेल की गरिमा को बचाने के लिए हर संदिग्ध मामले की जांच की जाती है। हालांकि अभी किसी खिलाड़ी पर औपचारिक आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, लेकिन ICC की यह सक्रियता क्रिकेट कनाडा के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
