वाराणसी की तंग गलियों और चौराहों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से अब जल्द ही राहत मिलने वाली है। देश के पहले ‘शहरी रोपवे प्रोजेक्ट’ (Urban Ropeway Project) का काम अब अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुंच गया है। प्रशासन की योजना है कि मानसून की दस्तक से पहले रथयात्रा से गोदौलिया के बीच ‘रोप पुलिंग’ (तार खींचने का काम) पूरा कर लिया जाए।
बारिश से पहले मेगा ट्रायल की तैयारी
प्रोजेक्ट की गति को देखते हुए अधिकारियों ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। कैंट से रथयात्रा तक का पहला सेक्शन पहले ही तैयार हो चुका है, जहाँ ऑस्ट्रियाई विशेषज्ञों ने सफलतापूर्वक काम पूरा किया था। अब दूसरे सेक्शन पर फोकस है ताकि बारिश के दौरान काम में कोई बाधा न आए।
वाराणसी रोपवे की खास बातें:
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दूरी और समय: कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक का सफर अब घंटों के बजाय मात्र 16 मिनट में पूरा होगा।
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क्षमता: कुल 148 ट्रॉलीकार चलेंगी, जिसमें हर ट्रॉली में 10 यात्री बैठ सकेंगे।
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फ्रीक्वेंसी: हर घंटे एक दिशा में लगभग 3,000 यात्री सफर कर सकेंगे।
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सर्विस: यह सुविधा रोजाना 16 घंटे तक उपलब्ध रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन
इस प्रोजेक्ट में सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा रहा है। ऑस्ट्रिया की विशेषज्ञ टीम ड्रोन और अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए टावर एलाइनमेंट की जांच कर रही है। यूरोप से मंगाए गए खास उपकरणों की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि रोपवे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित हो।
काशीवासियों और पर्यटकों को क्या होगा फायदा?
वाराणसी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए गोदौलिया पहुंचना हमेशा से एक चुनौती रहा है। रोपवे शुरू होने के बाद:
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बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं का समय बचेगा।
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शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा और ऑटो का दबाव कम होगा।
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पर्यटकों को ‘बर्ड्स आई व्यू’ से काशी की खूबसूरती देखने का मौका मिलेगा।
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