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West Bengal Congress: कौन हैं सुभंकर सरकार? छात्र राजनीति से प्रदेश अध्यक्ष बनने तक का पूरा सफर और सियासी समीकरण

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब भी किसी सुलझे हुए और जमीनी नेता का नाम लिया जाता है, तो सुभंकर सरकार का चेहरा प्रमुखता से सामने आता है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) के अध्यक्ष के रूप में, उन पर बंगाल में कांग्रेस को फिर से जीवित करने की एक बड़ी जिम्मेदारी है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

सुभंकर सरकार का जन्म 2 जनवरी 1960 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ था। वह एक शिक्षित और संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

  • पिता: देबब्रत सरकार

  • माता: बिजोन बाला सरकार

  • शिक्षा: उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से LLB (1986) और Library Science (1990) में स्नातक किया है।

  • परिवार: उनकी पत्नी का नाम श्रीमती लूरा रे सरकार है। उनके दो पुत्र हैं— आंदोलन सरकार और अलोरन सरकार।

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर

सुभंकर सरकार का राजनीतिक करियर करीब तीन दशक पुराना है। उन्होंने अपनी पहचान किसी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि संगठन की सीढ़ियां चढ़कर बनाई है:

  • 1993: NSUI के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता बने।

  • 1996: पश्चिम बंगाल छात्र परिषद के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए।

  • 2004-06: भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्य किया।

  • 2013: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव बने और कई राज्यों (केरल, तमिलनाडु, कश्मीर) के संगठनात्मक कार्यों को देखा।

बंगाल की राजनीति में ‘जातिगत समीकरण’ और चुनौती

बंगाल में ममता बनर्जी (TMC) की मजबूत पकड़ के बीच कांग्रेस ने सुभंकर सरकार को अध्यक्ष बनाकर एक सवर्ण कार्ड (कायस्थ जाति) खेला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इसके जरिए राज्य के शिक्षित और मध्यम वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में है।

2021 का चुनाव और वर्तमान जिम्मेदारी

हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में सुभंकर सरकार को नोआपारा सीट से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए हाईकमान ने उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी। इससे पहले उन्होंने अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम के प्रभारी के रूप में भी अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवाया है।

संपत्ति और छवि

चुनावी हलफनामे के अनुसार, सुभंकर सरकार की कुल संपत्ति लगभग 7.42 करोड़ रुपये है। सबसे खास बात यह है कि दशकों के राजनीतिक करियर के बावजूद उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जो उनकी बेदाग और स्वच्छ छवि को दर्शाता है।

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