मध्य पूर्व (West Asia) में जारी संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशों को रविवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में आयोजित शांति वार्ता विफल हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस 21 घंटे की सघन चर्चा के बाद बिना किसी समझौते के पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं।
वार्ता विफल होने के 3 मुख्य कारण बैठक में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे, लेकिन कुछ बुनियादी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी:
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परमाणु प्रतिबद्धता: अमेरिका ने ईरान से ‘मौलिक प्रतिबद्धता’ मांगी थी कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। जे.डी. वेंस के अनुसार, ईरान की ओर से इस पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
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अनुचित मांगें: दूसरी ओर, ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमेरिकी पक्ष की ‘अनुचित मांगों’ और गैर-कानूनी शर्तों की वजह से बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
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सामरिक हित: ‘Strait of Hormuz’, प्रतिबंधों को हटाने और युद्ध के हर्जाने जैसे जटिल विषयों पर दोनों देशों के रुख में बड़ा अंतर देखा गया।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और वर्तमान स्थिति इस ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान ने की। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से युद्धविराम (Ceasefire) बनाए रखने की अपील की है। हालांकि वार्ता विफल रही है, लेकिन वेंस ने संकेत दिया है कि उन्होंने ईरान को सोचने के लिए समय दिया है और अमेरिका का ‘अंतिम प्रस्ताव’ अभी भी मेज पर है।
आगे क्या होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इस विफलता के बाद समुद्री व्यापारिक मार्ग (Strait of Hormuz) पर तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका ने पहले ही क्षेत्र में माइन-स्वीपिंग जहाज भेजकर दबाव बढ़ा दिया है। अब दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम और अमेरिका के दो सप्ताह के ‘हमला विराम’ (Pause in attacks) के खत्म होने पर टिकी हैं।
