लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद को सुचारू बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गेहूं खरीद के दौरान आ रही बोरों की कमी को दूर करने के लिए ‘यूज़्ड’ (पुराने) जूट बोरों की सीधी खरीद के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है।
क्यों आई बोरों की किल्लत?
इस बार गेहूं की सरकारी खरीद 30 मार्च से शुरू हो चुकी है, लेकिन कई केंद्रों पर बोरों की उपलब्धता न होने से काम प्रभावित हो रहा था। विभाग के अनुसार, ईरान-इजरायल युद्ध जैसी भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में जूट की आपूर्ति बाधित हुई है और इसके दाम भी बढ़ गए हैं।
कैबिनेट के फैसले की बड़ी बातें
सरकार ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए ई-टेंडर और जेम (GeM) पोर्टल की अनिवार्य प्रक्रियाओं में ढील दी है:
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सीधी खरीद: अब खाद्य एवं रसद विभाग सीधे राशन विक्रेताओं (उचित दर विक्रेताओं) से पुराने जूट बोरे खरीदेगा।
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तत्काल उपलब्धता: इस फैसले से लगभग 25,000 गांठ जूट बोरे तुरंत उपलब्ध हो सकेंगे।
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पारदर्शी दरें: इन बोरों की कीमत का निर्धारण आयुक्त खाद्य तथा रसद द्वारा गठित एक विशेष समिति करेगी, जिसमें भारतीय खाद्य निगम (FCI) के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
किसानों को क्या होगा फायदा?
अक्सर देखा जाता है कि केंद्रों पर बोरे न होने के कारण किसानों को अपनी उपज लेकर लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस फैसले के बाद:
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खरीद में तेजी: बोरों की कमी से रुकने वाली तौल अब निर्बाध रूप से चलेगी।
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समय की बचत: किसानों को क्रय केंद्रों पर दिनों-दिन इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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समय सीमा: सरकार का लक्ष्य 50 लाख टन गेहूं की खरीद को तय समय के भीतर पूरा करना है।
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