नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ ‘मंगलवार’ (7 अप्रैल 2026) को बड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बाद एशियाई शेयर बाजारों में बिकवाली का दौर शुरू हो गया है।
ट्रंप की चेतावनी और बाजार में ‘रेड सिग्नल’
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक विवादित पोस्ट के जरिए ईरान के पावर प्लांट और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बनाने की बात कही है। उन्होंने विशेष रूप से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खोलने की चेतावनी दी है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
एशियाई बाजारों का हाल: हर तरफ गिरावट
ट्रंप के इस कड़े रुख के बाद निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी है:
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Gift Nifty: भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेतक माने जाने वाले गिफ्टी निफ्टी में सुबह 160 से 200 अंकों की तेज गिरावट देखी गई।
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निक्केई (जापान): जापान का प्रमुख इंडेक्स लगभग 150 अंक नीचे ट्रेड कर रहा है।
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कोस्पी और हैंगसेंग: साउथ कोरिया और हांगकांग के बाजारों में भी 200 अंकों तक की फिसलन दर्ज की गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
बीते सोमवार को भारतीय बाजार (सेंसेक्स-निफ्टी) ने शानदार रिकवरी दिखाई थी, लेकिन मंगलवार की सुबह अंतरराष्ट्रीय संकेतों ने चिंता बढ़ा दी है।
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कच्चे तेल की कीमतें: यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जो भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए निगेटिव है।
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रुपये पर दबाव: वैश्विक अस्थिरता के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो सकता है।
एक्सपर्ट की सलाह
बाजार के जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। युद्ध की धमकियों के बीच बाजार में Volatality (उतार-चढ़ाव) अधिक रह सकती है, इसलिए ‘Stop Loss’ का इस्तेमाल करना और सुरक्षित स्टॉक्स पर ध्यान देना समझदारी होगी।
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