नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायपालिका की शुचिता को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे वकील को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया, जिस पर जज के नाम पर लाखों रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों के लिए कोर्ट में कोई जगह नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद पंजाब की एक निचली अदालत से जुड़ा है। आरोप है कि याचिकाकर्ता वकील ने तलाक के एक लंबित मामले में पीड़ित पक्ष से 30 लाख रुपये की मांग की थी। वकील ने दावा किया था कि वह अपने व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल कर जज से ‘अनुकूल आदेश’ (Favourable Order) दिलवा देगा।
सीबीआई की कार्रवाई:
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अगस्त 2025 में सीबीआई ने इस मामले में जाल बिछाया था।
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वकील के सहयोगी को 4 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
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इसके बाद 70 वर्षीय मुख्य आरोपी वकील को गिरफ्तार कर लिया गया।
“जज को बाजार में बेच रहे थे आप”
सुनवाई के दौरान जब वकील के बचाव पक्ष ने उनकी 70 वर्ष की आयु और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सहानुभूति की मांग की, तो बेंच ने कड़ा रुख अपनाया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: > “आपने एक न्यायाधीश को खुले बाजार में बेचने की कोशिश की। वह न्यायपालिका को बेच रहा था… हमें ऐसे लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है। यह कोई साधारण जालसाजी का मामला नहीं है।”
हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
आरोपी वकील ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा फरवरी में जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वकील पिछले आठ महीनों से हिरासत में है और उसकी दलील थी कि अभी तक आरोप (Charges) तय नहीं किए गए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी को देखते हुए याचिकाकर्ता ने अंततः अपनी याचिका वापस ले ली।
