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असम चुनाव: टेनिस खिलाड़ी से लेकर बिजनेस टाइकून तक, कौन हैं रिनिकी भुइयां सरमा?

चुनाव से पहले असम की राजनीति में गरमाया ‘पासपोर्ट विवाद’

असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है। इस बार केंद्र में मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने इस चुनावी मुकाबले को एक नया मोड़ दे दिया है।

क्या हैं आरोप और क्या है सच्चाई?

कांग्रेस का दावा है कि रिनिकी के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ जैसे देशों के कई विदेशी पासपोर्ट हैं। इसके अलावा, उनकी एक कंपनी का टर्नओवर अरबों डॉलर बताया गया है।

जवाब में कड़ी कार्रवाई:

  • मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है।

  • सीएम ने चेतावनी दी है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चुनाव प्रभावित करने की सजा उम्रकैद तक हो सकती है।

  • रिनिकी भुइयां सरमा ने इन आरोपों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है।

टेनिस कोर्ट से बिजनेस अंपायर तक का सफर

विवादों से परे, रिनिकी की पहचान असम में एक बेहद सफल उद्यमी (Entrepreneur) की रही है।

  • शुरुआती जीवन: 31 जुलाई 1973 को जन्मी रिनिकी असम के बड़े उद्योगपति जाधव चंद्र भुइयां की बेटी हैं।

  • खेल जगत: कॉलेज के दिनों में वह एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी थीं और राज्य स्तर पर खेल चुकी हैं।

  • लव स्टोरी: उनकी और हिमंत बिस्वा सरमा की मुलाकात 1992 में कॉटन कॉलेज में हुई थी, जिसके बाद 2001 में दोनों ने शादी कर ली।

रिनिकी का व्यापारिक साम्राज्य: एक नज़र में

रिनिकी भुइयां सरमा असम के सबसे बड़े मीडिया समूहों में से एक, ‘प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट’ की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उनके पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • मीडिया: न्यूज़ लाइव, नॉर्थ ईस्ट लाइव और नियमिया वार्ता (अखबार)।

  • अन्य निवेश: चाय बागान, रियल एस्टेट और पब्लिकेशन हाउस।

  • संपत्ति: 2026 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 32.79 करोड़ रुपये है, जो 2011 की तुलना में 1400% की वृद्धि दर्शाती है।

निष्कर्ष: सॉफ्ट टारगेट या गंभीर सवाल?

असम की राजनीति में रिनिकी अक्सर विपक्ष के निशाने पर रहती हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि उन्हें ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाया जाता है क्योंकि वे मुख्यमंत्री की पत्नी हैं। वहीं, विपक्ष इसे पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दे से जोड़कर देख रहा है। 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव में देखना होगा कि जनता इन आरोपों को किस तरह लेती है।

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