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बिना हाथ-पैर के वर्ल्ड चैंपियन: मिलिए पैरा-आर्चर पायल नाग से, जिन्होंने गरीबी और अपंगता को मात देकर जीता गोल्ड।

6 अप्रैल 2026 को बैंकॉक के खेल मैदान में जब भारत का राष्ट्रगान गूंजा, तो दुनिया एक ऐसी खिलाड़ी को देख रही थी जिसने विज्ञान और किस्मत, दोनों की सीमाओं को पीछे छोड़ दिया था। वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज के फाइनल में 18 साल की पायल नाग ने वर्ल्ड नंबर वन शीतल देवी को 139-136 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

हादसा जिसने छीन लिए थे चारों अंग

पायल की कहानी उड़ीसा के बालंगीर जिले के एक छोटे से गांव ‘जमुना बहाल’ से शुरू होती है। एक राजमिस्त्री पिता की बेटी पायल जब तीसरी कक्षा में थी, तब रायपुर में एक निर्माणाधीन इमारत की छत पर करंट लगने से वह बुरी तरह झुलस गई। डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए उसके दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े। महज 8 साल की उम्र में पायल के पास न हाथ थे, न पैर।

“लोग कहते थे कि यह लड़की न खा पाएगी, न चल पाएगी, इसे जहर दे दो।” – यह वह दर्दनाक सलाह थी जो पायल के माता-पिता को उस वक्त मिली थी।

पेंटिंग से तीरंदाजी तक का सफर

पायल को अनाथालय भेजा गया, जहां उसने बिना हाथों के पेंटिंग करना सीखा। उसकी प्रतिभा पर तत्कालीन कलेक्टर चंचल राणा और अधिकारी अनु गर्ग की नजर पड़ी। लेकिन पायल की जिंदगी तब बदली जब प्रसिद्ध कोच कुलदीप वेदवान (जिन्होंने शीतल देवी को निखारा था) ने उनका वीडियो ट्विटर पर देखा।

इंजीनियरिंग का चमत्कार: कैसे चलाती हैं तीर?

शीतल देवी के पास कम से कम उनके पैर थे, लेकिन पायल ‘क्वार्ट्रपल एम्प्युटी’ (चारों अंग न होना) थीं। चुनौती यह थी कि धनुष कैसे पकड़ा जाए?

  • कस्टम डिवाइस: कोच वेदवान ने एक विशेष स्टील डिवाइस बनाया जो पायल के प्रोस्थेटिक (नकली) पैर से जुड़ता है।

  • सख्त ट्रेनिंग: पायल रोजाना 8 घंटे अभ्यास करती हैं।

  • सटीकता: वह 360 में से 350+ का स्कोर हासिल करती हैं, जो एक वर्ल्ड क्लास मानक है।

मैदान पर सफलता के आंकड़े

प्रतियोगिता उपलब्धि खास बात
जयपुर नेशनल्स डबल गोल्ड शीतल देवी को पहली बार हराया
दुबई एशियन गेम्स इंटरनेशनल डेब्यू वैश्विक पहचान मिली
बैंकॉक वर्ल्ड सीरीज गोल्ड मेडल व्यक्तिगत और टीम इवेंट में स्वर्ण

बहन का साथ और भविष्य का लक्ष्य

पायल अपनी सफलता का श्रेय अपनी बड़ी बहन वर्षा को देती हैं, जो साये की तरह उनके साथ रहती हैं। कोच कुलदीप का मानना है कि पायल आगामी LA पैरालंपिक्स में भारत के लिए सबसे बड़ी पदक उम्मीद हैं।

आज पायल की जीत उन लोगों के लिए सबसे बड़ा जवाब है, जिन्होंने कभी उनके अस्तित्व पर सवाल उठाए थे।

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