देश में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मेडिकल कॉलेजों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वसूली पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि MBBS कोर्स के लिए छात्र अब केवल साढ़े चार साल की ही फीस देंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर देखा गया है कि कई निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेज छात्रों से पूरे 5 या 5.5 साल की फीस वसूलते हैं। NMC के संज्ञान में आया कि कॉलेज उस ‘इंटर्नशिप’ अवधि के लिए भी पैसे ले रहे हैं, जिसमें कोई औपचारिक कक्षाएं (Formal Teaching) नहीं होतीं। इसी विसंगति को दूर करने के लिए आयोग ने नई गाइडलाइन जारी की है।
नए नियमों की मुख्य बातें:
-
कोर्स की अवधि का गणित: NMC के अनुसार, MBBS का मुख्य शैक्षणिक सत्र 4.5 साल (54 महीने) का होता है। कॉलेज केवल इसी अवधि के पैसे ले सकते हैं।
-
इंटर्नशिप के लिए कोई फीस नहीं: एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पढ़ाई का हिस्सा है, लेकिन इसके लिए छात्रों से शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) लेना नियमों के खिलाफ है।
-
स्टाइपेंड देना अनिवार्य: आयोग ने पाया कि कई संस्थान छात्रों से फीस तो ले रहे थे, लेकिन उन्हें इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाला भत्ता (Stipend) नहीं दे रहे थे। अब ऐसा करना भारी पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला: > NMC ने अपने आदेश में ‘अभिषेक यादव बनाम भारत संघ’ मामले का जिक्र किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि शिक्षा का शुल्क पारदर्शी होना चाहिए और संस्थानों को केवल उतनी ही फीस लेनी चाहिए, जितनी सुविधाएं वे दे रहे हैं।
नियम तोड़ा तो क्या होगा?
NMC ने सभी मेडिकल संस्थानों को सख्त चेतावनी दी है। यदि कोई कॉलेज तय सीमा से अधिक फीस वसूलता है या इंटर्नशिप के दौरान छात्रों का आर्थिक शोषण करता है, तो उस पर:
-
भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
-
कॉलेज की मान्यता पर संकट आ सकता है।
-
कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अभिभावकों और छात्रों के लिए सलाह
यदि आप या आपके परिवार में कोई MBBS कर रहा है, तो फीस रसीद और कॉलेज के नियमों को ध्यान से देखें। किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली होने पर छात्र NMC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
