काठमांडू/नई दिल्ली: भारत और नेपाल के रिश्तों में एक नई कूटनीतिक सक्रियता देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) को आधिकारिक तौर पर नई दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा है। हालांकि, नेपाल की ओर से इस यात्रा को लेकर एक बेहद ‘प्रोफेशनल’ और स्पष्ट रुख अपनाया गया है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह भारत दौरे पर तभी आएंगे, जब दोनों देश तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर अपना ‘होमवर्क’ पूरा कर लेंगे।
दौरे से पहले ‘ठोस नतीजों’ पर जोर
मॉरीशस में आयोजित नौवें हिंद महासागर सम्मेलन (IOC) के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नेपाल के विदेश मंत्री खनाल के बीच अहम बातचीत हुई। इस मुलाकात के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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प्राथमिकता तय करना: उच्च-स्तरीय यात्राएं तभी होंगी जब नेपाल की अपनी विकास प्राथमिकताओं और परियोजनाओं को एजेंडे में जगह मिलेगी।
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प्रतीकात्मकता से आगे: दोनों पक्ष अब केवल ‘फोटो-ऑप’ या औपचारिक दौरों के बजाय ऐसे समझौतों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं जिनका जमीन पर असर दिखे।
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पुराने तंत्रों की समीक्षा: भारत और नेपाल के बीच जल संसाधन, सुरक्षा, व्यापार और कृषि जैसे क्षेत्रों में लगभग 36 द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। इनमें से कई वर्षों से निष्क्रिय हैं, जिन्हें अब सक्रिय किया जाएगा।
अहम जानकारी: प्रधानमंत्री मोदी ने 27 मार्च को बालेन शाह के पदभार ग्रहण करते ही उन्हें बधाई संदेश के साथ यह न्योता भेजा था।
अगला कदम क्या होगा?
नेपाल सरकार अब अपनी आंतरिक तैयारियां पूरी कर रही है। एक बार जब काठमांडू अपनी प्राथमिकताओं की ठोस रूपरेखा तैयार कर लेगा, तो इसे भारतीय पक्ष के साथ साझा किया जाएगा। इसके बाद भारत के विदेश सचिव के नेपाल दौरे की उम्मीद है, जो प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए अंतिम रोडमैप तैयार करेंगे।
क्यों खास है बालेन शाह का यह रुख?
बालेन शाह की छवि एक स्वतंत्र और परिणाम-केंद्रित नेता की रही है। उनकी विदेश नीति में ‘नेपाल फर्स्ट’ की झलक साफ दिख रही है। वे भारत के साथ सहयोग के नए रास्ते तलाशने के पक्ष में तो हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि पुरानी अटकी हुई परियोजनाओं (जैसे सिंचाई और सीमा प्रबंधन) पर पहले ठोस प्रगति हो।
