भोपाल: प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा से जुड़ा एक अहम तथ्य सामने आया है। उनका अस्थि कलश पिछले 53 वर्षों से भोपाल में सुरक्षित रखा गया है। यह कलश उनके बड़े पुत्र के परिवार के पास संरक्षित है, जो वर्तमान में यहीं निवास कर रहा है।
🔹 1973 में हुआ था देह त्याग
जानकारी के अनुसार, बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में अनंत चतुर्दशी के दिन देह त्याग किया था।
- इसके बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किया गया
- हालांकि, एक हिस्सा परिवार अपने साथ भोपाल ले आया
- वही हिस्सा आज तक सुरक्षित रखा गया है
🔹 भोपाल से था खास जुड़ाव
परिवार के अनुसार, बाबा का भोपाल से विशेष लगाव रहा है।
- वर्ष 1970 में वह अरेरा कॉलोनी में करीब 10 दिन रुके थे
- इस दौरान उन्होंने शहर के कई स्थानों का दौरा किया
- नेवरी मंदिर में रात्रि विश्राम भी किया
🔹 परिवार की आस्था और दावा
बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने बताया—
- परिवार बाबा को हनुमान जी का स्वरूप मानता है
- बाबा ने स्वयं उन्हें हनुमान जी की प्रतिमा भेंट की थी
- जिसकी आज भी नियमित पूजा की जाती है
परिवार का दावा है कि इस तरह का अस्थि कलश पूरे देश में कहीं और मौजूद नहीं है।
🔹 मंदिर और आश्रम की योजना
अब भोपाल में नीम करोली बाबा का भव्य मंदिर और आश्रम बनाने की योजना तैयार की जा रही है।
- इसी परिसर में अस्थि कलश को स्थापित किया जाएगा
- इससे यह स्थान भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन सकता है
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📌 निष्कर्ष:
भोपाल में सुरक्षित यह अस्थि कलश न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि बाबा और शहर के गहरे संबंध को भी दर्शाता है।
