मेरठ: शास्त्रीनगर स्थित प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट इन दिनों अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के सीलिंग आदेश ने यहाँ के हजारों व्यापारियों की रातों की नींद उड़ा दी है। लेकिन इस संकट से ज्यादा चर्चा उन ‘लापता’ पोस्टरों की हो रही है, जो व्यापारियों ने अपने ही चुने हुए प्रतिनिधियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर वायरल किए हैं।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी
व्यापारियों का आरोप है कि जब हजारों परिवारों की आजीविका दांव पर लगी है, तब क्षेत्रीय सांसद अरुण गोविल, ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर और महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने उनसे दूरी बना ली है। सोशल मीडिया ग्रुप्स में इन नेताओं की तस्वीरों के साथ ‘लापता’ लिखे पोस्टर साझा किए जा रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है:
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“हमने वोट अपनी आवाज उठाने के लिए दिया था, न कि संकट में अकेला छोड़ने के लिए।”
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केंद्र और राज्य दोनों जगह प्रभावी सरकार होने के बावजूद राहत न मिलना निराशाजनक है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: क्या है पूरा मामला?
6 अप्रैल को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण और नियमों के उल्लंघन को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार:
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44 संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से सील करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
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इसमें व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ बैंक, अस्पताल और स्कूल भी शामिल हैं।
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अगले दो महीने के भीतर सभी 860 भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह बंद करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष सुदीप जैन और किसान मजदूर संगठन के विजय राघव जैसे स्थानीय नेताओं ने इसे व्यापारियों के साथ ‘छलावा’ करार दिया है। जानकारों का मानना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा होने के कारण भाजपा नेता सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने से बच रहे हैं, लेकिन व्यापारियों की मांग है कि सरकार कानूनी रास्ता निकालकर उनके रोजगार को बचाए।
