मेरठ, उत्तर प्रदेश: मेरठ शहर को लंबे समय से चले आ रहे ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर के व्यस्ततम इलाकों में शुमार भैंसाली रोडवेज बस अड्डे को अब शहर के बाहर शिफ्ट करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट से न केवल शहर की यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए भी यह आर्थिक रूप से बड़ा लाभ लेकर आया है।
किसानों को मिलेगा ₹40 करोड़ का मुआवजा
नए बस अड्डे के निर्माण के लिए प्रशासन कुल 39,930 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण कर रहा है। इस प्रक्रिया में 4 प्रमुख गांवों के 79 किसानों की भूमि चिन्हित की गई है, जिनके लिए प्रशासन ने 40 करोड़ रुपये से अधिक का बजट तैयार किया है।
इन 4 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित:
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भूडबराल
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सिवाया
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पल्हैड़ा
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दुल्हैड़ा
जांच के बाद ही मिलेगा पैसा: मंडलायुक्त के सख्त निर्देश
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंडलायुक्त ने गहन जांच के आदेश दिए हैं।
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रिकॉर्ड सत्यापन: 12 साला और 1359 फसली रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जमीन सरकारी तो नहीं है।
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कानूनी स्थिति: भूमि के स्वामित्व, विरासत और कोर्ट में लंबित किसी भी वाद (Legal Case) की रिपोर्ट मांगी गई है।
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मौका मुआयना: एसडीएम के नेतृत्व में लेखपालों ने जमीन की भौतिक स्थिति का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंप दी है।
मेरठ को क्या होगा फायदा?
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जाम से मुक्ति: रोजाना मेरठ शहर में प्रवेश करने वाली 400 से अधिक बसों का दबाव खत्म होगा।
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एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं: नए बस अड्डे का निर्माण NCRTC द्वारा किया जाएगा, जहाँ यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।
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कनेक्टिविटी: मोदीपुरम और भूडबराल के पास बस अड्डा बनने से दिल्ली और देहरादून की ओर जाने वाले यात्रियों को शहर के भीतर फंसने की जरूरत नहीं होगी।
अगला कदम क्या है?
जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक दस्तावेज और मूल्य निर्धारण समिति की रिपोर्ट मंडलायुक्त कार्यालय को भेज दी है। अनुमति मिलते ही किसानों के खातों में मुआवजे की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी और निर्माण कार्य शुरू होगा।
