अक्सर हम दोस्ती या रिश्तेदारी निभाने के चक्कर में बैंक के लोन पेपर्स पर ‘गारंटर’ के तौर पर साइन कर देते हैं। हमें लगता है कि हम सिर्फ एक गवाह (Witness) हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सुप्रीम कोर्ट और RBI के नियमों के अनुसार, अगर मुख्य कर्जदार (Borrower) पैसा नहीं चुकाता, तो बैंक आपको ‘दूसरा कर्जदार’ मानता है।
यहाँ वे 5 बड़े जोखिम दिए गए हैं जो आपकी वित्तीय आज़ादी को खत्म कर सकते हैं:
1. आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर खतरे में
जैसे ही आप गारंटर बनते हैं, वह लोन आपके क्रेडिट रिकॉर्ड में भी दिखाई देने लगता है। यदि मुख्य कर्जदार केवल 3 EMI बाउंस करता है, तो बैंक उसे डिफॉल्टर घोषित करता है। इसका सीधा असर आपके पैन (PAN) कार्ड से जुड़े सिबिल स्कोर पर पड़ता है।
नुकसान: भविष्य में जब आपको खुद के लिए होम लोन या कार लोन चाहिए होगा, तो बैंक आपका आवेदन रिजेक्ट कर देगा क्योंकि आप एक ‘डिफॉल्टर लोन’ के गारंटर हैं।
2. बैंक आपकी संपत्ति जब्त कर सकता है
कानूनी रूप से बैंक के पास यह अधिकार है कि वह बकाया राशि वसूलने के लिए पहले मुख्य कर्जदार की तलाश करे। लेकिन, यदि उससे वसूली नहीं हो पाती है, तो बैंक गारंटर की संपत्ति (मकान, प्लॉट, गाड़ी) को कुर्क या नीलाम कर सकता है। आप कानूनी तौर पर इसके लिए पहले से सहमति दे चुके होते हैं।
3. ‘गारंटर’ से ‘कर्जदार’ बनने का सफर
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के अनुसार, बैंक और गारंटर के बीच होने वाला समझौता एक कानूनी गारंटी है। इसमें स्पष्ट लिखा होता है कि मूल राशि के साथ-साथ लगने वाला पूरा ब्याज और पेनाल्टी चुकाने की जिम्मेदारी आपकी होगी। बैंक आपको सीधे नोटिस भेजकर वसूली शुरू कर सकता है।
4. आपकी लोन लेने की क्षमता (Eligibility) कम होना
मान लीजिए आपकी लोन क्षमता ₹50 लाख है और आपने किसी के ₹20 लाख के लोन में गारंटी दी है। अब बैंक की नजर में आप पहले से ₹20 लाख के कर्ज के नीचे दबे हैं। ऐसे में बैंक आपको सिर्फ ₹30 लाख तक का ही लोन देगा।
5. जिम्मेदारी से पीछे हटना नामुमकिन
एक बार गारंटर बनने के बाद आप बीच में अपना नाम वापस नहीं ले सकते, जब तक कि:
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लोन पूरी तरह चुकता न हो जाए।
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कर्जदार कोई दूसरा ‘मजबूत’ गारंटर पेश न कर दे जिसे बैंक स्वीकार करे।
Table: गारंटर बनने से पहले ये चेकलिस्ट जरूर भरें
| प्रश्न | क्या करना चाहिए? |
| रिश्ता कैसा है? | केवल उन पर भरोसा करें जिनकी वित्तीय स्थिति आप जानते हों। |
| रीपेमेंट हिस्ट्री? | चेक करें कि क्या उन्होंने पहले कभी लोन डिफॉल्ट किया है? |
| लोन का बीमा? | सुनिश्चित करें कि कर्जदार ने Term Insurance लिया है, ताकि उसकी मृत्यु की स्थिति में बोझ आप पर न आए। |
निष्कर्ष: भावना में न बहें, गणित समझें
गारंटर बनना सिर्फ कागजों पर साइन करना नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई को दांव पर लगाना है। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए वित्तीय नियमों और बढ़ती ब्याज दरों के बीच, गारंटी तभी दें जब आप उस कर्ज को खुद चुकाने की क्षमता रखते हों।
प्रो टिप: अगर कोई बहुत करीबी है, तो गारंटर बनने के बजाय उसे ‘को-एप्लीकेंट’ (Co-applicant) बनने की सलाह दें या लोन सुरक्षा बीमा अनिवार्य करवाएं।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. क्या गारंटर बनने से मेरा बैंक बैलेंस फ्रीज हो सकता है?
जी हाँ, यदि मामला कोर्ट में जाता है और आप भुगतान नहीं करते, तो बैंक आपके खातों को अटैच (Freeze) करने का आदेश ला सकता है।
Q2. क्या बैंक पहले मुख्य कर्जदार के खिलाफ जाएगा या मेरे?
आमतौर पर बैंक पहले कर्जदार से वसूली करता है, लेकिन कानूनी रूप से वह दोनों पर एक साथ या सिर्फ गारंटर पर भी केस कर सकता है।
Q3. क्या मैं गारंटी से अपना नाम हटवा सकता हूँ?
यह बहुत कठिन है। इसके लिए बैंक की लिखित अनुमति और एक वैकल्पिक गारंटर की आवश्यकता होती है।
