आईवियर ब्रांड लेंसकार्ट (Lenskart) अपनी नई ‘स्टाइल गाइड’ और ड्रेस कोड पॉलिसी को लेकर विवादों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर इस नीति को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है, जिसमें कंपनी पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लग रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत फिल्ममेकर अशोक पंडित के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लेंसकार्ट की कथित ‘स्टाइल गाइड’ की एक तस्वीर साझा करते हुए कंपनी की मंशा पर सवाल उठाए। अशोक पंडित का आरोप है कि कंपनी एक तरफ कुछ विशेष धार्मिक पहचान को अनुमति दे रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों पर पाबंदी लगा रही है।
स्टाइल गाइड में क्या है? (प्रमुख बिंदु)
सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्टों और दावों के मुताबिक, लेंसकार्ट ने अपने कर्मचारियों के लिए निम्नलिखित नियम तय किए हैं:
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धार्मिक प्रतीकों पर रोक: गाइडलाइन में कथित तौर पर तिलक लगाने, बिंदी लगाने, कलावा (धार्मिक धागा) पहनने और धार्मिक स्टिकर के उपयोग पर रोक की बात कही गई है।
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हिजाब और पगड़ी: नियमों के अनुसार, हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति है, लेकिन शर्त यह है कि वे केवल काले रंग के होने चाहिए और उन पर कंपनी का लोगो नहीं ढका होना चाहिए।
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अन्य पाबंदियां: कर्मचारियों को टोपी (Hats) पहनने की अनुमति नहीं है और टैटू को छिपाने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, हाइजीन के लिए हेयर नेट का उपयोग अनिवार्य बताया गया है।
सोशल मीडिया पर ‘बायकॉट’ की गूँज
अशोक पंडित ने इस नीति को “असमानता” दर्शाने वाला बताया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि एक धार्मिक पहचान को सीमित अनुमति दी जा सकती है, तो तिलक और बिंदी जैसे पारंपरिक प्रतीकों पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों? उनके इस बयान के बाद ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर #BoycottLenskart ट्रेंड करने लगा है।
कॉर्पोरेट पॉलिसी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी कंपनी के ड्रेस कोड पर विवाद हुआ हो। विशेषज्ञ इसे कॉर्पोरेट ब्रांडिंग बनाम व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की बहस के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, लेंसकार्ट की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है।
