नई दिल्ली: आबकारी नीति मामले में नया मोड़ दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को शराब नीति से जुड़े मामले में एक दिलचस्प मोड़ आया। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने यह इच्छा जताई कि वे अपनी पैरवी स्वयं (In-person) करना चाहते हैं। कोर्ट ने फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल 2026 के लिए तय की है।
कोर्ट रूम में क्या हुआ?
केजरीवाल अपनी पत्नी के साथ अदालत में पेश हुए थे। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि उन्हें अपनी ‘रिक्यूजल एप्लीकेशन’ (Recusal Application – जज को केस से हटने की याचिका) पर खुद दलीलें पेश करने की अनुमति दी जाए।
कानूनी प्रक्रिया की चुनौती: बेंच ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से तभी बहस कर सकता है जब वह अपने वकील को केस से हटा (Discharge) दे।
-
केजरीवाल का तर्क: “मैं अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करूँगा। फिलहाल मैंने किसी को अपना वकालतनामा नहीं दिया है।”
-
सॉलिसिटर जनरल की आपत्ति: CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे ‘थिएट्रिक्स’ (नाटकबाजी) करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर केजरीवाल खुद लड़ना चाहते हैं तो उन्हें अपने वकील को औपचारिक रूप से हटाना होगा।
मुख्य विवाद: जज को बदलने की मांग
केजरीवाल ने एक याचिका दायर कर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से इस केस की सुनवाई से हटने की मांग की है।
-
वजह: याचिका में आशंका जताई गई है कि सुनवाई निष्पक्ष नहीं हो सकती।
-
कोर्ट का एक्शन: हाईकोर्ट ने इस याचिका पर CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
-
पुरानी टिप्पणी: इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते समय ED के खिलाफ कुछ सख्त टिप्पणियां की थीं, जिन्हें हटाने के लिए एजेंसी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है? यह पूरा विवाद दिल्ली की उस शराब नीति के इर्द-गिर्द है जिसे अब रद्द किया जा चुका है। CBI का आरोप है कि लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं। ट्रायल कोर्ट द्वारा पहले दी गई राहत को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी जा रही है, जो केजरीवाल के राजनीतिक और कानूनी भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
