कैलाश विजयवर्गीय का बंगाल मिशन से पीछे हटने का बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों चर्चा में हैं। कभी पश्चिम बंगाल में भाजपा के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले विजयवर्गीय इस बार वहां के चुनावी रण से गायब हैं। रतलाम दौरे के दौरान उन्होंने खुद इस सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है कि आखिर वे इस बार बंगाल की जमीन पर कदम क्यों नहीं रख रहे हैं।
‘गिरफ्तारी का डर और 38 फर्जी केस’
विजयवर्गीय ने पत्रकारों से सीधी बात करते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ने उनके खिलाफ साजिश रचने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति के पीछे तीन मुख्य कारण बताए:
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फर्जी मुकदमों की भरमार: उनके अनुसार, बंगाल में उनके खिलाफ 38 फर्जी मामले दर्ज किए गए हैं।
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गिरफ्तारी की तलवार: कई मामलों में वारंट जारी होने के कारण, वहां कदम रखते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
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पार्टी का निर्देश: किसी भी नए विवाद से बचने के लिए भाजपा नेतृत्व ने खुद उन्हें बंगाल न जाने की सलाह दी है।
ममता सरकार पर तीखा हमला: ‘बजरंग बली की कृपा से बचा हूं’
विजयवर्गीय ने भावुक होते हुए कहा, “मैं छह साल वहां रहा हूं। अगर आज मैं सुरक्षित हूं तो यह केवल बजरंग बली की कृपा है, वरना मेरी फोटो पर अब तक माला टंग गई होती।” उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास माफियाओं और स्मगलरों की एक पूरी फौज है, जो सत्ता को प्रभावित करती है।
क्या है इसका राजनीतिक मायना?
पिछले विधानसभा चुनाव में विजयवर्गीय बंगाल के प्रभारी थे। इस बार उनकी अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। उनके इस ताजा खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच की लड़ाई कितनी व्यक्तिगत और कानूनी पेचीदगियों में उलझी हुई है।
