जयपुर/नई दिल्ली: राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य के बहुचर्चित 20,000 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में मुख्य आरोपी और रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को गुरुवार को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। सुबोध अग्रवाल लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे थे और उनके खिलाफ कोर्ट से वारंट भी जारी हो चुका था।
महीनों तक चला लुका-छिपी का खेल
सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं थी। ACB की टीमों ने उन्हें पकड़ने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया था:
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तलाश का दायरा: 21 शहरों के 100 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई।
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पूछताछ: उनके रिश्तेदारों, दोस्तों, यहां तक कि घरेलू सहायकों और ड्राइवरों सहित 50 से अधिक लोगों से सवाल-जवाब किए गए।
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सोशल मीडिया पर नजर: ACB ने आरोपियों के सोशल मीडिया संपर्कों को भी ट्रैक किया।
क्या है 20,000 करोड़ का यह घोटाला?
यह पूरा मामला पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग (PHED) में टेंडर प्रक्रिया के दौरान किए गए भ्रष्टाचार से जुड़ा है। जाँच में सामने आया कि:
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फर्जी सर्टिफिकेट: दो निजी कंपनियों ने IRCON द्वारा जारी फर्जी ‘कम्प्लीशन सर्टिफिकेट’ लगाकर करोड़ों के टेंडर हासिल किए।
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नियमों का उल्लंघन: तत्कालीन ACS सुबोध अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर टेंडरों में ‘साइट विजिट सर्टिफिकेट’ की शर्त जोड़ी।
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गोपनीयता भंग: इस शर्त की वजह से बोली लगाने वालों (Bidders) की पहचान उजागर हो गई, जिससे मिलीभगत बढ़ी और टेंडर प्रीमियम 30-40% तक महंगा हो गया।
10 इंजीनियर और अधिकारी पहले ही जेल में
सुबोध अग्रवाल 1988 बैच के IAS अधिकारी हैं और पिछले साल 31 दिसंबर को रिटायर हुए थे। इस मामले में वे अकेले नहीं हैं; ACB अब तक 10 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें विभाग के वरिष्ठ इंजीनियर और अधिकारी शामिल हैं। फिलहाल ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं।
अहम जानकारी: जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुँचाना है। राजस्थान में इस योजना में हुए भ्रष्टाचार ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
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