मध्य पूर्व (Middle East) का संघर्ष अब उस मोड़ पर आ गया है जहाँ कूटनीति की गुंजाइश खत्म होती दिख रही है। ईरान की “आमंत्रण रणनीति” और अमेरिका की “सर्जिकल स्ट्राइक” की तैयारी के बीच, यह समझना जरूरी है कि अगला कदम कितना विनाशकारी हो सकता है।
1. ईरान की ‘आमंत्रण रणनीति’: “आओ हमें मारो”
ईरान का व्यवहार उस छात्र की तरह है जो सजा से नहीं डरता। वह अमेरिका को उकसा रहा है क्योंकि उसे पता है कि 20-25 करोड़ की आबादी वाले देश को पूरी तरह खत्म करना असंभव है। ईरान का मानना है कि अमेरिका जितना हमला करेगा, ईरानी जनता उतनी ही एकजुट होगी और शासन को ‘पुनर्जन्म’ मिलेगा।
2. अमेरिका का संभावित ‘गेम प्लान’: दो बड़े विकल्प
व्हाइट हाउस के हालिया संकेतों और सामरिक स्थितियों को देखें तो अमेरिका दो मुख्य दिशाओं में बढ़ सकता है:
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खर्ग आइलैंड (Kharg Island) पर कब्जा: ईरान का 90% तेल निर्यात इसी द्वीप से होता है। यह मुख्य भूमि से 25 किमी दूर समुद्र में है। अमेरिका अपनी नौसैनिक श्रेष्ठता का उपयोग कर इस पर कब्जा कर सकता है, जिससे ईरान की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट जाएगी।
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लिमिटेड न्यूक्लियर वॉर (सीमित परमाणु युद्ध): यह एक डरावनी लेकिन संभव स्थिति है। रणनीति यह हो सकती है कि ईरान के ही परमाणु केंद्रों (जैसे नतांज) पर ऐसा हमला किया जाए कि वहां मौजूद ‘फजाइल मटेरियल’ खुद एक धमाके का रूप ले ले। इससे अमेरिका पर सीधा परमाणु हमले का आरोप भी नहीं आएगा और ईरान को अपूरणीय क्षति होगी।
3. न्यूक्लियर एनरिचमेंट का गणित: क्यों नहीं बना अब तक बम?
आम धारणा है कि ईरान के पास यूरेनियम है तो बम क्यों नहीं चलाता? इसका जवाब विज्ञान में छिपा है।
यूरेनियम के आइसोटोप्स और एनरिचमेंट
परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम का एक विशेष आइसोटोप $U^{235}$ चाहिए होता है।
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प्राकृतिक अवस्था: कच्चा यूरेनियम (पिचब्लेंड) में $U^{235}$ की मात्रा 1% से भी कम होती है।
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बम ग्रेड यूरेनियम: हथियार बनाने के लिए इसे 90% तक एनरिच (Enrich) करना पड़ता है।
ईरान की वर्तमान स्थिति: रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास लगभग 450 किग्रा यूरेनियम है, लेकिन वह केवल 60% तक एनरिच है। उसे 90% तक ले जाने के लिए जिस तकनीक और समय की जरूरत है, अमेरिका उसी ‘मटकी’ (सेंट्रीफ्यूज मशीनों) को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।
4. टनल वॉरफेयर: अमेरिका ढूंढ क्यों नहीं पा रहा?
हमास ने जो गाजा में किया, उसका मास्टरमाइंड ईरान है। ईरान ने पिछले दो दशकों में अमेरिका की अफगानिस्तान और इराक की लड़ाइयों को डिकोड किया है।
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अभेद्य सुरंगें: ईरान ने ऊंचे पहाड़ों के नीचे मीलों लंबी सुरंगें (Missile Cities) बना ली हैं।
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तकनीकी सीमा: अमेरिका का सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर बम (जैसे B-2 बॉम्बर से गिराए जाने वाले) लगभग 80 फीट तक ही गहराई में मार कर सकते हैं। ईरान की सुरंगें इससे कहीं अधिक गहरी और पहाड़ों के ठोस पत्थरों के नीचे हैं।
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कारगिल और पोखरण का सबक: जैसे भारत ने सैटेलाइट्स की नजरों से बचकर पोखरण में परमाणु परीक्षण किया, ईरान ने भी अपनी मिसाइल और न्यूक्लियर संपदा को ‘आटे में नमक’ की तरह छुपा दिया है।
5. खमेनेई की शहादत और ईरान का पुनरुत्थान
पश्चिमी मीडिया ने खमेनेई को ‘डरपोक’ और ‘छुपा हुआ’ दिखाया, लेकिन असल में उन्होंने अपनी उपस्थिति को एक वैचारिक हथियार बनाया। 86 वर्ष की आयु में, युद्ध के बीच सार्वजनिक रूप से सामने आना एक सोची-समझी रणनीति थी।
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अगर उन पर हमला होता है, तो वह ईरानियों के लिए ‘शहीद’ बन जाएंगे।
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यह घटना उन लोगों को भी शासन के साथ खड़ा कर देगी जो पहले इसका विरोध कर रहे थे।
निष्कर्ष
ईरान युद्ध अब ‘छिटपुट बम धमाकों’ से ऊपर निकल चुका है। अमेरिका अब ‘मोटिवेशन’ को मारने की योजना बना रहा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि क्या यह संघर्ष पारंपरिक हथियारों तक सीमित रहेगा या दुनिया हिरोशिमा-नागासाकी के बाद पहली बार किसी ‘अदृश्य परमाणु हमले’ की गवाह बनेगी।
