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ईरान-अमेरिका में महाविनाश का आगाज! करा ब्रिज हमले पर भड़के राष्ट्रपति पेजिशकियन, ट्रंप की बड़ी चेतावनी

यहाँ इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य विवरण दिया गया है:


1. ईरान के राष्ट्रपति का कड़ा रुख

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के हमलों को “हार की निशानी” बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • अधूरे पुल (B1 ब्रिज) पर हमला करना अमेरिका की सैन्य विफलता और नैतिक पतन को दर्शाता है।

  • ईरान सरेंडर नहीं करेगा और वे फिर से और भी मजबूत इमारतें और पुल बनाएंगे।

  • उन्होंने अस्पतालों और दवा कंपनियों पर हमलों को “मानवता के खिलाफ अपराध” करार दिया है।

2. B1 ब्रिज पर हमला और ट्रंप की चेतावनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ईरान का “सबसे बड़ा पुल ढहाना” बताया है।

  • हमले का असर: कराज (Karaj) में स्थित यह पुल ईरान का सबसे ऊँचा पुल माना जाता था। हमले में कम से कम 8 लोगों की मौत हुई और 95 घायल हुए।

  • ट्रंप की चेतावनी: ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि “ईरान समझौता कर ले इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर ईरान पीछे नहीं हटा, तो उसे “पत्थर युग” (Stone Age) में भेजने जैसे कड़े हमले किए जा सकते हैं।

3. ईरान का “टारगेट लिस्ट” (पुलों पर जवाबी हमले की धमकी)

जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान ने खाड़ी देशों और जॉर्डन के उन पुलों की सूची जारी की है, जिन्हें वह निशाना बना सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • कुवैत: शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ब्रिज।

  • सऊदी अरब और बहरीन: किंग फहद ब्रिज (जो दोनों देशों को जोड़ता है)।

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): शेख जायद ब्रिज, अल मक्ता ब्रिज और शेख खलीफा ब्रिज।

  • जॉर्डन: अलनबी किंग हुसैन ब्रिज, डामिया एडमम ब्रिज और अबदून ब्रिज।

4. टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर वॉर

ईरानी सेना (IRGC) ने पहली बार अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों को सीधे तौर पर निशाना बनाना शुरू किया है:

  • Amazon और Oracle: ईरान ने बहरीन में Amazon के ऑफिस और दुबई में Oracle के डेटा सेंटर पर मिसाइल हमले का दावा किया है।

  • वजह: ईरान का मानना है कि ये टेक कंपनियाँ अमेरिकी खुफिया और सैन्य अभियानों में मदद कर रही हैं।

  • नोट: हालांकि दुबई के मीडिया ऑफिस ने ओरेकल पर हमले के दावे को खारिज कर दिया है।

5. सैन्य कमांडर की मौत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बासिज (Basij) फोर्स के कमांडर मोहम्मद सरलाक की तेहरान में एक चेक पॉइंट पर तैनाती के दौरान अमेरिका/इजरायल के हमले में मौत हो गई है। यह ईरान के लिए एक बड़ा सैन्य झटका माना जा रहा है।


वर्तमान स्थिति:

इजरायल की सिक्योरिटी कैबिनेट की बैठक और ईरानी मेजर जनरल अमीर खतामी के सख्त आदेशों से साफ है कि यह संघर्ष अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है। अमेरिका जहाँ “ग्राउंड ऑपरेशन” और “रिजीम चेंज” (सत्ता परिवर्तन) की बात कर रहा है, वहीं ईरान अपने परमाणु ठिकानों और रणनीतिक संपत्तियों की रक्षा के लिए “करारा जवाब” देने की तैयारी में है।

यह युद्ध न केवल मध्य पूर्व (Middle East) बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी एक गंभीर खतरा बन गया है।

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