दुनिया जब तीसरे विश्व युद्ध की आहट से सहमी हुई थी, तभी इस्लामाबाद से आई एक खबर ने सबको राहत दी। ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि पाकिस्तान की हफ्तों की गुप्त कूटनीति का नतीजा है।
अक्टूबर 2025 में गज़ा युद्ध को लेकर शुरू हुई तनातनी जब चरम पर थी, तब पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच एक ‘ब्रिज’ का काम किया।
‘पसंदीदा’ फील्ड मार्शल और पुराने रिश्ते
इस पूरी बातचीत में दो कड़ियां सबसे अहम रहीं। एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर भरोसा, जिन्हें ट्रंप अपना ‘पसंदीदा’ जनरल बता चुके हैं। दूसरी तरफ, ईरान के साथ पाकिस्तान के ऐतिहासिक और ‘भाईचारे’ वाले संबंध।
पाकिस्तान ने इन दोनों समीकरणों का इस्तेमाल कर संदेशों को एक राजधानी से दूसरी राजधानी तक पहुँचाया।
समझौते की वो ‘नाज़ुक’ रात
युद्धविराम की आधिकारिक घोषणा से कुछ घंटे पहले तक स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी। इस्लामाबाद में कूटनीतिक गलियारों से जो खबरें निकलकर सामने आ रही थीं, वे कुछ इस प्रकार थीं:
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गंभीर माहौल: बातचीत में शामिल सूत्र बताते हैं कि माहौल ‘गंभीर और शांत’ था।
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दबाव की रणनीति: सऊदी अरब पर हुए हमलों के बाद पाकिस्तान ने ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाया, जिसने मुमकिन है कि तेहरान पर दबाव बढ़ाया हो।
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अंतिम प्रयास: आधी रात के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘X’ पर ट्रंप से समयसीमा बढ़ाने और ईरान से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ खोलने की अपील की।
अब आगे क्या होगा?
भले ही युद्धविराम की घोषणा हो गई है, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी नाज़ुक है।
“हम अभी भी बहुत सतर्क हैं, दोनों पक्षों के बीच अब भी भरोसे की भारी कमी है।” – पाकिस्तानी सूत्र (बीबीसी से बातचीत में)
अगला पड़ाव शुक्रवार, 10 अप्रैल को होने वाली इस्लामाबाद बैठक है। यहाँ दोनों पक्षों के प्रतिनिधि एक टेबल पर बैठेंगे। क्या यह शांति स्थायी होगी या यह सिर्फ एक छोटा ब्रेक है? पूरी दुनिया की नजरें अब पाकिस्तान की राजधानी पर टिकी हैं।
