मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक नया और अधिक आक्रामक मोड़ ले लिया है। ईरान के सीनियर सैन्य कमांडरों ने अमेरिका और इजरायल को सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनके नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) को निशाना बनाया गया, तो इसके परिणाम बेहद विनाशकारी होंगे।
ईरान की चेतावनी के मुख्य बिंदु:
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कड़ा संदेश: ईरान के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने स्पष्ट किया कि हमलावरों के लिए “नरक के दरवाजे” खोल दिए जाएंगे।
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रक्षा का संकल्प: सशस्त्र बल राष्ट्र के अधिकारों और संपत्तियों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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तालमेल: यह बयान ‘खतम अल-अंबिया’ मुख्यालय से आया है, जो ईरानी सेना और IRGC के बीच ऑपरेशन्स का समन्वय करता है।
हमलों का बढ़ता दायरा और ईरान का तर्क
ईरान का आरोप है कि पिछले कुछ समय में अमेरिका और इजरायल ने केवल सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि बच्चों के स्कूल, अस्पताल, धार्मिक धरोहरों और तेल रिफाइनरियों जैसे नागरिक ठिकानों को भी निशाना बनाया है।
शनिवार (4 अप्रैल, 2026) को दिए अपने बयान में मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने कहा कि 28 फरवरी की घटनाओं के बाद से ईरान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को साबित किया है और वे किसी भी हमलावर को उसकी सही जगह दिखाने में सक्षम हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सीधी चेतावनी के बाद मिडिल ईस्ट में ‘प्रॉक्सि वॉर‘ के सीधे संघर्ष में बदलने की आशंका बढ़ गई है। जहाँ एक तरफ अमेरिका अपने मिलिट्री बेस की सुरक्षा को लेकर चौकन्ना है, वहीं ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा में एक पल की भी देरी नहीं करेगा।
मौजूदा स्थिति की गंभीरता:
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जवाबी हमले: ईरान लगातार अमेरिकी मिलिट्री एसेट्स और इजरायली ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की बात कर रहा है।
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आर्थिक प्रभाव: ऑयल रिफाइनरियों और सिविलियन रूट पर हमलों के डर से वैश्विक बाजार में भी हलचल देखी जा रही है।
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आम नागरिक: इस तनाव का सबसे बुरा असर स्कूल, अस्पताल और बाजारों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर पड़ रहा है।
