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मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पाक में जुटेगा अमेरिका-ईरान का डेलिगेशन, होर्मुज संकट और तेल की कीमतों पर टिकी दुनिया की नजर

इस्लामाबाद/तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बड़ी कूटनीतिक हलचल का केंद्र बनने वाली थी, लेकिन ईरान के ताजा रुख ने इस पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक लेबनान में इजरायली हमले बंद नहीं होते और सीजफायर लागू नहीं होता, वह अमेरिका के साथ किसी भी समझौते या बातचीत में शामिल नहीं होगा।

क्यों अहम है यह इस्लामाबाद वार्ता?

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद के सेरेना होटल में एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इसके लिए अमेरिकी डेलिगेशन आज पाकिस्तान पहुंच सकता है। इस वार्ता के एजेंडे में चार मुख्य बिंदु शामिल हैं:

  • ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम: यूरेनियम संवर्धन पर नियंत्रण।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता।

  • बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम: लंबी दूरी की मिसाइलों पर पाबंदी।

  • प्रतिबंध हटाना: ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध तुरंत खत्म हों।

होर्मुज जलडमरूमध्य: तेल बाजार के लिए नया ‘टोल’ संकट

ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का ‘ट्रांजिट शुल्क’ (टोल) ले सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में मांगा गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचा जा सके। ब्रिटेन और अमेरिका ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है, इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन बताया है।

सऊदी अरब को बड़ा आर्थिक नुकसान

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित हमलों के कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को भारी क्षति पहुंची है। अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों की वजह से सऊदी के तेल उत्पादन में रोजाना करीब 10 लाख बैरल की कमी आई है।

लेबनान में मानवीय संकट गहराया

एक तरफ कूटनीतिक रस्साकशी जारी है, तो दूसरी तरफ इजरायली हमलों से लेबनान के हालात बदतर हो गए हैं। अब तक 8 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों (UNIFIL) पर हुए हमलों की 60 से अधिक देशों ने निंदा की है, जिसमें भारत के पड़ोसी देश और वैश्विक शक्तियां शामिल हैं।

निष्कर्ष: ईरान का कड़ा रुख और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने शांति वार्ता की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है। यदि कल इस्लामाबाद में बातचीत नहीं होती है, तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

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