भारतीय सेना का आकाश में दबदबा अब और भी बढ़ने वाला है। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारत ने अपने ‘उड़ते टैंकों’ यानी अटैक हेलीकॉप्टरों की संख्या में भारी इजाफा करने का फैसला किया है। भारतीय सेना और वायुसेना मिलकर आने वाले वर्षों में लगभग 200 विशेष अटैक हेलीकॉप्टरों का संचालन करने की तैयारी में हैं।
इसमें स्वदेशी तकनीक से बना ‘प्रचंड’ (LCH) और अमेरिका की ताकत ‘अपाचे’ (AH-64E) मुख्य भूमिका निभाएंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमारे पास रफाल और सुखोई जैसे शक्तिशाली फाइटर जेट्स हैं, तो इन हेलीकॉप्टरों की जरूरत क्यों पड़ती है?
फाइटर जेट बनाम अटैक हेलीकॉप्टर: क्या है अंतर?
अक्सर लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन युद्ध के मैदान में दोनों की भूमिकाएं पूरी तरह अलग हैं:
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फाइटर जेट (हवाई हमलावर): इनका मुख्य काम दुश्मन की सीमा के बहुत अंदर जाकर बमबारी करना या हवाई युद्ध (Dogfight) लड़ना होता है। ये केवल वायुसेना के पास होते हैं और तेज रफ्तार के लिए जाने जाते हैं।
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अटक हेलीकॉप्टर (ग्राउंड सपोर्ट): इन्हें ‘उड़ता हुआ टैंक’ कहा जाता है। ये जमीन पर लड़ रही थल सेना के ठीक ऊपर रहकर उन्हें सुरक्षा देते हैं। ये पहाड़ों की चोटियों या छुपकर बैठे दुश्मन के टैंकों को बेहद करीब से तबाह करने में माहिर होते हैं।
भारतीय सेना की नई ताकत: प्रचंड और अपाचे
भारत अपनी हवाई मारक क्षमता को दो स्तरों पर मजबूत कर रहा है:
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LCH प्रचंड: यह दुनिया का इकलौता ऐसा हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर की ऊंचाई (जैसे सियाचिन) पर उतरने और उड़ान भरने में सक्षम है। सेना को जल्द ही 90 और वायुसेना को 66 अतिरिक्त प्रचंड हेलीकॉप्टर मिलने वाले हैं।
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अपाचे हेलीकॉप्टर: सेना के पास वर्तमान में 6 और वायुसेना के पास 22 अपाचे हेलीकॉप्टर हैं। ये अपनी मिसाइलों और रडार सिस्टम के लिए दुनिया के सबसे घातक हेलीकॉप्टर माने जाते हैं।
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रुद्र हेलीकॉप्टर: सेना और वायुसेना के पास लगभग 90 ‘रुद्र’ आर्म्ड हेलीकॉप्टर भी हैं, जो 20mm की ऑटोमैटिक तोप और रॉकेट से लैस हैं।
स्वदेशी मिसाइलों की मार
इन हेलीकॉप्टरों की असली ताकत उनमें लगी मिसाइलें हैं। ‘प्रचंड’ और ‘रुद्र’ को विशेष रूप से ‘ध्रुवास्त्र’ और ‘हेलिना’ मिसाइल दागने के लिए डिजाइन किया गया है। ये दोनों ही स्वदेशी ‘नाग’ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के आधुनिक रूप हैं, जो दुश्मन के भारी से भारी टैंक को पल भर में राख कर सकते हैं।
कब तक पूरा होगा लक्ष्य?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 156 अतिरिक्त ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी अगले साल से शुरू होने की उम्मीद है और यह प्रक्रिया 2033 तक पूरी हो जाएगी। यह कदम न केवल ‘आत्मनिर्भर भारत’ की मिसाल है, बल्कि सीमा पर चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के खिलाफ भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
