देश के बड़े बैंकों में शुमार IDBI Bank के निजीकरण (Privatization) की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर इस बैंक में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार बैंक की 60.72% हिस्सेदारी निजी हाथों में सौंपने के लिए दो प्रमुख खरीदारों के साथ बातचीत के अंतिम चरण में है।
संशोधित बोली (Revised Bid) की क्यों पड़ी जरूरत?
आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री पिछले 3 वर्षों से चर्चा में है। हालिया जानकारी के अनुसार, जिन दो संभावित खरीदारों ने दिलचस्पी दिखाई थी, उनकी शुरुआती बोली सरकार द्वारा तय किए गए ‘आरक्षित मूल्य’ (Reserve Price) से कम थी।
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ताजा अपडेट: सरकार ने अब इन बोलीदाताओं से अपनी रकम बढ़ाकर नई यानी संशोधित वित्तीय बोली पेश करने को कहा है।
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तकनीकी मूल्यांकन: फिलहाल बिक्री की प्रक्रिया तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) के दौर में है।
इन दो दिग्गज कंपनियों के बीच है मुकाबला
बैंकिंग जगत की इस बड़ी डील में दो विदेशी कंपनियों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं:
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फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स: प्रेम वत्सा के नेतृत्व वाली यह दिग्गज कंपनी बैंक को खरीदने की दौड़ में है।
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एमिरेट्स एनबीडी (Emirates NBD): पश्चिम एशिया की यह बड़ी बैंकिंग यूनिट भी आईडीबीआई में हिस्सेदारी के लिए बोली लगा चुकी है।
हिस्सेदारी का गणित: कौन कितना बेचेगा?
वर्तमान में सरकार और LIC के पास बैंक की कुल 94.71% हिस्सेदारी है। इसे बेचने का खाका कुछ इस तरह तैयार किया गया है:
| हिस्सेदार | वर्तमान हिस्सा | बेचने की योजना |
| भारत सरकार | 45.48% | 30.48% |
| LIC | 49.24% | 30.24% |
| कुल बिक्री | – | 60.72% |
पश्चिम एशिया संकट का असर
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच, सरकार विनिवेश (Disinvestment) के जरिए संसाधन जुटाना चाहती है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने के लिए वित्तीय मजबूती मिलेगी।
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
आम ग्राहकों के लिए बैंक का निजीकरण सेवाओं में सुधार और नई तकनीक के समावेश का रास्ता खोल सकता है। हालांकि, रणनीतिक बिक्री की प्रक्रिया पूरी होने में अभी कुछ और समय लग सकता है क्योंकि RBI का ‘फिट एंड प्रॉपर’ असेसमेंट अभी जारी है।
