गुवाहाटी सेंट्रल चुनाव 2026: ऑल इंडिया गोरखा लीग ने किया कुंकी चौधरी के समर्थन का ऐलान
असम विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। गुवाहाटी सेंट्रल (Guwahati Central) विधानसभा सीट पर एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब ऑल इंडिया गोरखा लीग (AIGL) ने असम जातीय परिषद (AJP) और ‘असोम सनमिलितो मोर्चा’ की उम्मीदवार कुंकी चौधरी को अपना बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की।
शिक्षित और युवा नेतृत्व पर भरोसा
ऑल इंडिया गोरखा लीग ने स्पष्ट किया है कि कुंकी चौधरी के समर्थन के पीछे उनकी उच्च शैक्षणिक योग्यता और आधुनिक विजन है।
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शिक्षा: कुंकी ने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) से ‘एजुकेशनल लीडरशिप’ में मास्टर डिग्री हासिल की है।
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अनुभव: NMIMS मुंबई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ाव उनकी काबिलियत का प्रमाण है। लीग का मानना है कि उनकी वैश्विक सोच और तकनीक आधारित शासन (Technology-driven governance) की समझ गुवाहाटी के युवाओं की समस्याओं को हल करने में सक्षम है।
ऐतिहासिक विरासत और गोरखा समुदाय से गहरा नाता
कुंकी चौधरी केवल एक युवा चेहरा नहीं हैं, बल्कि उनका परिवार भारतीय संविधान के निर्माण और गोरखा अधिकारों के इतिहास से जुड़ा है।
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उनकी माता, सुजाता गुरुंग, दिग्गज नेता डंबर सिंह गुरुंग के परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जिन्होंने ‘ऑल इंडिया गोरखा लीग’ की स्थापना की थी।
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उनके वंशज अरी बहादुर गुरुंग भी भारत की संविधान सभा (Constituent Assembly) के महत्वपूर्ण सदस्य थे। यही कारण है कि गोरखा समाज कुंकी को अपनी विरासत और अधिकारों का रक्षक मान रहा है।
कैसा होगा मुकाबला?
गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है। यहाँ एक तरफ BJP के अनुभवी नेता विजय कुमार गुप्ता हैं, तो दूसरी तरफ 27 वर्षीय युवा चेहरा कुंकी चौधरी।
विशेषज्ञ की राय: “राजनीति में जब युवा जोश के साथ ऐतिहासिक विरासत और उच्च शिक्षा का मेल होता है, तो वह टियर 2 और टियर 3 शहरों के जागरूक मतदाताओं को काफी प्रभावित करता है। गोरखा लीग का समर्थन कुंकी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।”
प्रमुख मुद्दे जिन पर रहेगी नजर:
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समावेशी विकास: सभी समुदायों की समान भागीदारी।
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युवा रोजगार: स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसरों का निर्माण।
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आधुनिक गवर्नेंस: शिक्षा और तकनीक के माध्यम से सरकारी सुविधाओं को सरल बनाना।
निष्कर्ष: ऑल इंडिया गोरखा लीग ने अपने सदस्यों और आम जनता से अपील की है कि वे कुंकी चौधरी का समर्थन करें। यह गठबंधन न केवल चुनावी आंकड़ों को प्रभावित करेगा, बल्कि यह गुवाहाटी की राजनीति में एक नए और शिक्षित नेतृत्व के आगमन का संकेत भी है।
