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Good Friday 2026: मौत के दिन को क्यों कहते हैं ‘गुड’? ये है असली सच, जो शायद ही आपको पता हो!

Good Friday 2026: आज 3 अप्रैल को है गुड फ्राइडे, जानें प्रभु यीशु के बलिदान की पूरी कहानी

आज यानी 3 अप्रैल 2026 को पूरी दुनिया में ईसाई धर्म के अनुयायी गुड फ्राइडे (Good Friday) मना रहे हैं। यह दिन ईसाई कैलेंडर के सबसे पवित्र और गंभीर दिनों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईसा मसीह की शहादत के इस दिन को ‘गुड’ क्यों कहा जाता है? आइए जानते हैं इसका इतिहास और महत्व।


2026 में गुड फ्राइडे और ईस्टर की तारीख

इस साल तारीखों का संयोग कुछ इस प्रकार है:

  • गुड फ्राइडे: 3 अप्रैल 2026

  • ईस्टर संडे: 5 अप्रैल 2026


इतिहास: क्यों दी गई थी सूली?

मान्यता है कि लगभग 2000 साल पहले, कट्टरपंथियों के उकसाने पर रोमन गवर्नर पिलातुस ने प्रभु यीशु (Jesus Christ) को सूली पर चढ़ाने का आदेश दिया था। यीशु पर राजद्रोह और धर्म के अपमान के झूठे आरोप लगाए गए थे। शुक्रवार के दिन ही उन्हें कांटों का ताज पहनाकर गोलगोथा नामक स्थान पर क्रूस पर चढ़ाया गया था।

इसे ‘गुड’ फ्राइडे क्यों कहते हैं?

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि मौत के दिन को ‘शुभ’ या ‘गुड’ क्यों कहा जाता है?

  1. पवित्रता का प्रतीक: पुराने समय में ‘Good’ का अर्थ ‘Holy’ (पवित्र) होता था।

  2. मानवता का उद्धार: ईसाइयों का मानना है कि यीशु ने अपने प्राण देकर पूरी मानवता के पापों का प्रायश्चित किया। यह बलिदान प्रेम और सेवा की जीत थी, इसलिए इसे ‘गुड’ कहा गया।


गुड फ्राइडे मनाने का सही तरीका

यह कोई उत्सव या त्योहार नहीं, बल्कि शोक और प्रार्थना का दिन है। आज के दिन:

  • चर्च में विशेष सभा: दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष प्रार्थना होती है, क्योंकि माना जाता है कि इसी समय यीशु क्रूस पर थे।

  • उपवास (Fasting): लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं और सादा भोजन करते हैं।

  • घंटी नहीं बजती: इस दिन चर्चों में शोक के कारण घंटी नहीं बजाई जाती, बल्कि लकड़ी के खटखटे का उपयोग होता है।

  • सजावट का अभाव: चर्च से सभी सजावटी वस्तुएं हटा दी जाती हैं और वेदी (Altar) खाली रखी जाती है।


निष्कर्ष (Significance)

गुड फ्राइडे हमें क्षमा (Forgiveness) की सबसे बड़ी सीख देता है। सूली पर चढ़ते समय भी यीशु ने कहा था— “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।” यह दिन हमें दूसरों के प्रति दया और प्रेम रखने की प्रेरणा देता है।


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