धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश: अगर आप प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो हिमाचल प्रदेश के जिला एवं सत्र न्यायालय का यह फैसला आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा जाता है कि सौदा रद्द होने पर विक्रेता ‘बयाना राशि’ (Advance Money) लौटाने से इनकार कर देते हैं, लेकिन कानून खरीदारों को सुरक्षा प्रदान करता है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की अदालत ने एक जमीन विक्रेता को आदेश दिया है कि वह खरीदार को 3.50 लाख रुपये की राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला साल 2016 से शुरू हुआ था। धर्मशाला क्षेत्र के एक खरीदार ने करीब 28 लाख रुपये में जमीन का सौदा तय किया था। प्रक्रिया के दौरान खरीदार ने 5 लाख रुपये अग्रिम (Advance) के तौर पर दिए थे।
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बाद में विवाद होने पर विक्रेता ने केवल 1.50 लाख रुपये ही वापस किए।
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शेष 3.50 लाख रुपये देने से विक्रेता ने साफ इनकार कर दिया था।
कोर्ट ने क्यों पलटा निचली अदालत का फैसला?
हैरानी की बात यह है कि शुरुआती सुनवाई में निचली अदालत ने विक्रेता के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन जिला न्यायालय ने गहराई से जांच की तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां:
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मालिकाना हक की कमी: जिस वक्त सौदा तय हुआ और पैसे लिए गए, उस समय विक्रेता उस जमीन का मालिक ही नहीं था। उसने बाद में वह जमीन खरीदी थी।
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तथ्य छिपाना: कोर्ट ने माना कि विक्रेता ने सौदे के समय खरीदार से सच छिपाया, जो कानूनी रूप से गलत है।
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बयाना राशि जब्त करने का नियम: अदालत ने स्पष्ट किया कि बयाना राशि केवल तभी जब्त की जा सकती है जब गलती खरीदार की हो। चूंकि यहाँ खामियां विक्रेता की ओर से थीं, इसलिए वह पैसे नहीं रोक सकता।
प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए सबक
इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रॉपर्टी डीलिंग में पारदर्शिता (Transparency) अनिवार्य है। यदि विक्रेता अनुबंध की शर्तों को पूरा नहीं करता या तथ्यों को छिपाता है, तो खरीदार को अपनी पूरी राशि ब्याज सहित पाने का कानूनी अधिकार है।
