दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर का अंत: 12 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
राजधानी दिल्ली के गुरु अर्जुन नगर इलाके में पिछले छह महीनों से चल रहे एक सुनियोजित ठगी के धंधे का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। रंजीत नगर थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो मालिकों सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया है।
यह गिरोह ‘रोडसाइड असिस्टेंस पॉलिसी’ के नाम पर मासूम वाहन मालिकों को अपना निशाना बनाता था।
ठगी का नया तरीका: ऐसे फंसाते थे जाल में
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह तकनीकी रूप से काफी संगठित था। ठगी का तरीका कुछ इस प्रकार था:
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लुभावना ऑफर: टेली-कॉलर ग्राहकों को फोन कर दावा करते थे कि उनकी पॉलिसी लेने पर भारत में कहीं भी गाड़ी खराब होने या टायर पंचर होने पर तत्काल सहायता दी जाएगी।
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भरोसा जीतना: ग्राहकों का विश्वास हासिल करने के लिए वे ‘कैश ऑन डिलीवरी’ (COD) की सुविधा देते थे और एक प्लास्टिक कार्ड भेजने का वादा करते थे।
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वसूली: जैसे ही ग्राहक को नकली कार्ड मिलता, उससे 3,000 से 4,000 रुपये वसूल लिए जाते थे। भुगतान के बाद, जब ग्राहक को असलियत में मदद की जरूरत पड़ती, तो हेल्पलाइन नंबर कभी काम नहीं करता था।
बरामदगी और गिरफ्तारी
पुलिस ने छापेमारी के दौरान रतन लाल कॉम्प्लेक्स स्थित इस सेंटर से भारी मात्रा में संदिग्ध सामान बरामद किया है, जिसमें शामिल हैं:
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एक पूरा कंप्यूटर सिस्टम।
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भारी मात्रा में नकली प्लास्टिक पॉलिसी कार्ड।
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ग्राहकों की डेटा शीट और उपस्थिति रजिस्टर।
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कॉल करने के लिए इस्तेमाल किए गए कई मोबाइल फोन।
पकड़े गए आरोपियों में दो मुख्य संचालक, सौरभ और शाहनवाज (दोनों की उम्र 28 वर्ष), शामिल हैं। उनके साथ 10 अन्य महिला और पुरुष टेली-कॉलर को भी हिरासत में लिया गया है।
कैसे रहें सुरक्षित?
इस तरह के कॉल सेंटर से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि:
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किसी भी अनधिकृत नंबर से आने वाले इंश्योरेंस या रोडसाइड असिस्टेंस के कॉल पर तुरंत भरोसा न करें।
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हमेशा अधिकृत डीलरशिप या नामी बीमा कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट से ही सेवाएं खरीदें।
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भुगतान करने से पहले कंपनी का पिछला रिकॉर्ड और रिव्यू जरूर चेक करें।
