क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में एक बड़ा और बुनियादी बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ पहले लोग सीधे तौर पर बिटकइन या अन्य टोकन खरीदने (Spot Trading) में दिलचस्पी रखते थे, अब बाजार का रुख डेरिवेटिव्स और लीवरेज ट्रेडिंग की तरफ तेजी से मुड़ गया है।
CoinMarketCap की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Binance ने अकेले 1.8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के वॉल्यूम पर अपना दबदबा बनाया हुआ है।
डेरिवेटिव्स का दबदबा: स्पॉट ट्रेडिंग से 6 गुना आगे
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि बाजार का लगभग 90% वॉल्यूम अब डेरिवेटिव्स (Futures, Margin, Options) से आ रहा है।
-
Binance का खेल: Binance पर डेरिवेटिव्स वॉल्यूम $1.54 ट्रिलियन तक पहुँच गया है, जो इसकी स्पॉट ट्रेडिंग ($264 बिलियन) से लगभग 6 गुना ज्यादा है।
-
OKX का हाल: यहाँ तो स्थिति और भी हैरान करने वाली है, जहाँ कुल मासिक गतिविधि का 93% हिस्सा केवल डेरिवेटिव्स से जुड़ा है।
क्यों बढ़ रहा है लीवरेज ट्रेडिंग का क्रेज?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब क्रिप्टो की कीमतें एक सीमित दायरे (Sideways movement) में रहती हैं, तो ट्रेडर्स कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए ‘लीवरेज’ या उधार लेकर ट्रेडिंग करने की रणनीति अपनाते हैं। इसी वजह से फ्यूचर्स और ऑप्शंस की मांग बढ़ी है।
संस्थागत निवेशकों (Institutions) की एंट्री
अब केवल छोटे ट्रेडर्स ही नहीं, बल्कि बड़े संस्थान भी क्रिप्टो डेरिवेटिव्स में रुचि ले रहे हैं।
-
Bitcoin Options: मिड-2025 तक बिटकॉइन ऑप्शंस में ओपन इंटरेस्ट $65 बिलियन तक पहुँच गया।
-
CME का रिकॉर्ड: शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) पर एक्टिविटी पिछले रिकॉर्ड के मुकाबले 46% अधिक रही है।
-
BlackRock का असर: ब्लैकरॉक के बिटकॉइन ETF (IBIT) से जुड़े डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स ने भी बाजार में संस्थागत भागीदारी को नई ऊंचाई दी है।
बाजार पर इसका क्या होगा असर?
डेरिवेटिव्स मार्केट में बढ़ती लिक्विडिटी का मतलब है कि बाजार अब अधिक परिपक्व (Mature) हो रहा है, लेकिन साथ ही यह उच्च जोखिम की ओर भी इशारा करता है। कुछ ही एक्सचेंजों (Binance, OKX, Bybit) के पास मार्केट का 68% हिस्सा होना यह भी दर्शाता है कि क्रिप्टो की दुनिया में अभी भी केंद्रीकरण (Centralization) काफी अधिक है।
